बुधवार, सितम्बर 30, 2020
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भारतीय रेसलिंग संघ के इंकार के बावजूद ईरानी कोच के बाहर होने की ख़बर आई सामने

भारतीय रेसलिंग संघ (WFI) की ओर से भारतीय फ़्रीस्टाइल मेंस कुश्ती के ईरानी कोच हुसैन करीमी को बर्ख़ास्त कर दिया गया है, इससे पहले भी ईरानी कोच के हटाए जाने की ख़बरों ने सोशल मीडिया पर ख़ूब सुर्ख़ियां बटोरी थीं। लेकिन तब द ब्रिज हिन्दी के साथ बात करते हुए भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण सिंह ने इस ख़बर का खंडन किया था और इसे झूठा क़रार दिया था।

इससे पहले द ब्रिज के साथ बातचीत में WFI अध्यक्ष ने इसे नकार दिया था

अब WFI के सहायक सचिव विकास तोमर ने न्यूज़ एजेंसी PTI को दिए बयान में इस बात पर मुहर लगा दी है और ईरानी कोच को बर्ख़ास्त करने की घोषणा कर दी है। हुसैन करीमी का कोचिंग क़रार टोक्यो ओलंपिक्स तक के लिए था, लेकिन उन्हें बुधवार को आधिकारिक तौर पर टर्मिनेशन नोटिस थमा दिया गया। इतना ही नहीं विकास तोमर ने इस ईरानी कोच के हटाए जाने का कारण जो बताया है वह हैरान करने वाला है।

”वह एक VIP संस्कृति में जीना चाह रहे थे, और उनकी मांगों के साथ लगातार तालमेल बैठा पाना हमारे लिए बेहद मुश्किल हो रहा था। हमने स्पोर्ट्स ऑथिरीटी ऑफ़ इंडिया (SAI) को भी इस बारे में अवगत करा दिया है और अब नए कोच की तलाश है। ईरानी कोच को ज़रूरत से ज़्यादा हर चीज़ों की शिक़ायत ही रहती थी, वह SAI के कैंप में नहीं रहना चाहते थे तो हमने उनके लिए एक अलग से फ़्लैट किराए पर दे रखा था, साथ ही साथ उनके लिए एक कार भी रखी हुई थी जिससे वह हर जगह जाते रहते थे। यहां तक कि जब नूर सुल्तान में यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग (UWW) का नियम था कि एक कमरे में दो लोग रहेंगे वहां भी वह किसी के साथ रूम साझा नहीं करना चाहते थे, इस तरह की चीज़ें हमारे लिए बेहद मुश्किल पैदा कर रही थी।” : विकास तोमर, सहायक सचिव, WFI

नूर-सुल्तान वर्ल्ड चैंपियनशिप के बाद भारतीय पहलवानों की रैंकिंग में भी फेरबदल

विकास ने ये भी बताया कि ईरानी कोच को 3500 अमेरिकी डॉलर प्रति माह की सैलरी पर अनुबंधित किया गया था, लेकिन उनकी इस तरह की मांगों को पूरा करने में WFI का हर महीने 5000 अमेरिकी डॉलर जा रहा था। इसके बावजूद खिलाड़ियों के साथ उनका रवैया भी अच्छा नहीं था।

”टूर्नामेंट में ईरानी कोच मैट पर तो जाते थे लेकिन पहलवानों के पसीने पोछने से मना कर देते थे, जबकि दूसरे सभी कोच बाउट के दौरान ऐसा करते हैं। यहां तक की ट्रेनिंग के दौरान भी वह पहलवानों को पसीने की वजह से छूने से इंकार कर देते थे, लेकिन ये हमारे भारत में नहीं चल सकता इसलिए मजबूरी में हमें उन्हें बर्ख़ास्त करना पड़ा।” : विकास तोमर, सहायक सचिव, WFI

WFI का पक्ष तो हमने जाना लेकिन ईरानी कोच का बयान या उनकी प्रतिक्रिया का इंतज़ार सभी को है, हालांकि उन्होंने इस पर सिर्फ़ इतना ही कहा कि,”भारत ने हमारा अनुबंध ख़त्म कर दिया, वहां का सिस्टम बहुत अजीब है।”

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बहरहाल अगर प्रदर्शन की बात की जाए तो भारत नूर सुल्तान वर्ल्ड चैंपियनशिप में फ़्री स्टाइल में 4 पदकों के साथ अब तक का सर्वश्रेष्ठ करने में क़ामयाब रहा था। भारतीय कुश्ती संघ को हुसैन करीमी को भी खोजने में बहुत समय लग गया था, ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि 1 नवंबर से शुरू होने वाले राष्ट्रीय कैंप के पहले क्या भारतीय कुश्ती संघ हुसैन करीमी का रिप्लेसमेंट खोज निकालेगा ?