गुरूवार, अक्टूबर 1, 2020
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2019 वर्ल्ड वेटलिफ़्टिंग चैंपियनशिप: मीरा बाई चानू से है देश को सबसे ज़्यादा भरोसा, क्या वह उम्मीदों पर खरी उतरेंगी ?

इस महीने की आख़िरी में होने वाली वर्ल्ड वेटलिफ़्टिंग चैंपियनशिप में अगर भारत को किसी पर सबसे ज़्यादा उम्मीद है तो वह हैं 25 वर्षीय मीरा बाई चानू। थाईलैंड के पटाया में में होने वाली इस विश्व चैंपियनशिप में मीरा बाई वही कारनामा दोहराना चाहेंगी जो उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स 2018 में किया था। मीरा बाई चानू ने गोल्ड कोस्ट में वेटलिफ़्टिंग में भारत को स्वर्ण पदक जिताया था।

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हालांकि इसमें कोई शक़ नहीं है कि कॉमनवेल्थ गेम्स से यहां चुनौती बहुत अलग होगी, लेकिन इसके बावजूद हाल ही में जिस तरह का प्रदर्शन मीरा बाई ने किया है उसने देश को पटाया में भी पदक का भरोसा दिला दिया है।

मीरा बाई चानू, गोल्ड मेडलिस्ट, कॉमनवेल्थ गेम्स 2018

मीरा बाई के लिए भले ही रियो ओलंपिक्स की यादें अच्छी न हों, जहां वह 12 में से सिर्फ़ दूसरी ऐसी वेटलिफ़्टर रहीं थी जिसने अपना इवेंट भी पूरा न किया हो। लेकिन इसे पीछे छोड़ते हुए मीरा बाई ने अमेरिका में हुए वर्ल्ड वेटलिफ़्टिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने वाली न सिर्फ़ भारतीय इतिहास की सिर्फ़ दूसरी भारतीय बनीं थी, बल्कि उन्होंने 48 किग्रा वर्ग में 194 किलो का भार उठाकर इतिहास रच दिया था।ट

इसके बाद मीरा भाई ने कॉमनवेल्थ गेम्स में भी गोल्ड मेडल जीता था लेकिन इसके बाद चोटिल होने की वजह से वह 10 महीने खेल से दूर रहीं थी। पर अब मीरा पूरी तरह से फ़िट हैं और उन्होंने वापसी करते हुए 2019 EGAT कप में भी गोल्ड मेडल जीतकर अपने फ़ॉर्म का संकेत दे दिया है।

लकड़ी का गट्ठर उठाने से गोल्ड मेडल तक का सफ़र

2017 वर्ल्ड वेटलिफ़्टिंग चैंपियनशिप में भी मीरा बाई ने जीता था गोल्ड

मीरा एक बेहद मामूली परिवार से आती हैं, उनका जन्म मणिपुर के छोटे से गांव नॉन्गपोक काकचिक में हुआ था। मीरा बाई 6 भाई बहनों में सबसे छोटी हैं, उनके पिता जी PWD में एक कर्मचारी थे और उनकी मां एक छोटी सी रिटेल शॉप चलाया करती थीं। छोटी सी उम्र में ही मीरा भाई अपने बड़े भाई के साथ पास के जंगल से जलाने वाली लकड़ियां उठाकर लाती थीं। 12 साल की उम्र तक पहुंचते पहुंचते मीरा भाई की ताक़त को घर वालों ने पहचान लिया था।

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पीटीआई को दिए इंटरव्यू में मीरा के भाई ने कहा था, ‘’एक बार की बात है मैं और मीरा लकड़ियों का गट्ठर उटाकर ला रहे थे, और वह इतना भारी हो गया था कि मुझसे नहीं उठाया जा रहा था। लेकिन तभी मीरा ने उसे बड़े ही आसानी से उठा लिया और वहां से क़रीब दो किलोमीटर दूर उठाकर घर ले आई थी।‘’

और इसके ही बाद मीरा बाई को उनकी इसी ताक़त में आगे बढ़ने के लिए परिवार ने साथ दिया और फिर वह आज जहां हैं उससे न सिर्फ़ उनके परिवार बल्कि पूरे देश को गर्व है।