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कुश्ती

स्वतंत्र भारत को पहला व्यक्तिगत ओलम्पिक मेडल दिलवाने वाले 'केडी जाधव'

स्वतंत्र भारत को पहला व्यक्तिगत ओलम्पिक मेडल दिलवाने वाले केडी जाधव
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Ankit Pasbola

Published: 28 Nov 2019 7:52 AM GMT

खाशाबा दादासाहेब जाधव (केडी जाधव) का जन्म महाराष्ट्र के सतारा में 15 जनवरी 1926 को हुआ। उनके पिता दादासाहेब भी पहलवान थे इसीलिए उनका झुकाव भी कुश्ती की तरफ था। देश की आजादी के अगले ही साल 1948 लंदन ओलम्पिक खेलों में केडी जाधव ने कुश्ती में भारत का प्रतिनिधित्व किया। छोटे कद के बड़े पहलवान 'केडी जाधव' उन्होंने अपने पहले ओलम्पिक खेलों में भले ही पदक न जीता हो लेकिन अपने प्रदर्शन से प्रभावित किया। पहले ओलम्पिक खेलों में हारने के बाद केडी जाधव ने अगले चार सालों में जमकर मेहनत की और खुद को कड़ी चुनौती के लिए तैयार किया।

देश का नाम रोशन करने वाले केडी जाधव की आर्थिक स्थिति भी कमजोर थी लेकिन वह उन्हें नायक बनने से नहीं रोक सकी। राज्य सरकार और उनके परिचितों से मिली आर्थिक मदद भी उन्हें ओलम्पिक में भेजने के लिए पर्याप्त नहीं थी। इसके बाद उन्होंने लोगों से पैसे मांगकर हेलसिंकी ओलम्पिक में भाग लिया। अगला ओलम्पिक केडी जाधव के लिए खास रहा। उन्होंने ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया जो पहले कभी नहीं हुआ था। केडी जाधव ने हेलसिंकी ओलम्पिक में कुश्ती में 52 किलोग्राम वर्ग में भारत को कांस्य पदक दिलवाया। वह पहले ऐसे भारतीय बने जिन्होंने ओलम्पिक में व्यक्तिगत स्पर्धा में पदक जीता।

जीवन की तमाम चुनौतियों को पार करते हुए उन्होंने नया इतिहास रच दिया। किसी भी क्षेत्र में जो सर्वप्रथम है वह उल्लेखनीय है, इसीलिए उनका उल्लेख भारत के ओलम्पिक विजेताओं में सबसे पहले किया जाता है। उनके 44 साल बाद भारत ने अपना दूसरा व्यक्तिगत पदक जीता, जब लिएंडर पेस ने साल 1996 में आयोजित हुए अटलांटा ओलम्पिक में लॉन टेनिस में कांस्य पदक जीता। उन्हें उस दौर में ‘पॉकेट डायनमो’ के नाम से भी जाना जाता था। लेकिन आज उनकी पहचान सिर्फ कुछ धूल खाते अखबारों, कुछ ब्लॉग्स और कुछ लेखों में सिमट कर रह गई है। पूर्व दिग्गज पहलवान केडी जाधव की मौत 1984 में सड़क दुर्घटना में हो गई। दुर्भाग्यवश वह इकलौते ऐसे ओलम्पिक पदक विजेता हैं जिनको अब तक पदम पुरुष्कार नहीं मिला है। उन्हें साल 2001 में अर्जुन पुरुस्कार से सम्मानित किया गया था।

1952 ओलम्पिक में भारत का प्रदर्शन :

पोडियम में के डी जाधव 1952 ओलम्पिक

 ओलम्पिक 1952 में भारत ने 11 खेलों में हिस्सा लेने के लिए 64 खिलाड़ियों का दल हेलसिंकी भेजा। इस ओलम्पिक में भारत को कुल दो पदक प्राप्त हुए। हमेशा की तरफ इस बार भी हॉकी टीम ने नाम के मुताबिक प्रदर्शन किया और देश को स्वर्ण पदक दिलवाया। उनके अलावा केडी जाधव ने कुश्ती में इतिहास रचते हुए कांस्य पदक जीता। फिनलैंड में खेले गये ओलम्पिक में भारत पदक तालिका में 26वें स्थान पर रहा जबकि इसमें कुल 43 देशों ने हिस्सा लिया।

भारतीय रेसलरों का अब तक ओलम्पिक में प्रदर्शन:

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सुशील कुमार ने ओलम्पिक खेलों में दो पदक जीते हैं।

भारत की ओर से कुश्ती में अब तक चार पहलवानों ने पांच पदक जीते हैं। सबसे पहले केडी जाधव (1952) ने कांस्य पदक जीता। उनके 56 सालों के बाद सुशील कुमार ने 2008 बीजिंग ओलम्पिक में कांस्य पदक और 2012 लंदन ओलम्पिक में रजत पदक जीता। साल 2012 में योगेश्वर दत्त ने भी कांस्य पदक जीता। पिछले रियो ओलम्पिक (2016) में साक्षी मलिक ने में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा। वह ओलम्पिक में पदक जीतने वाली इकलौती महिला रेसलर हैं।

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