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पिकलबॉल एसोसिएशन के दिव्यांग अध्यक्ष को एयरलाइन ने नहीं दी उड़ान की इजाजत, जानें पूरा मामला

प्रभु ने आरोप लगाया कि यह पहली बार है जबकि एयरलाइन ने 'व्हीलचेयर वाले यात्रियों के लिए कोई नीति नहीं होने' के आधार पर उन्हें बोर्डिंग पास देने से इनकार कर दिया।

पिकलबॉल एसोसिएशन के दिव्यांग अध्यक्ष को एयरलाइन ने नहीं दी उड़ान की इजाजत, जानें पूरा मामला
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Pratyaksha Asthana

Updated: 2022-09-20T20:28:38+05:30

बाली में आयोजित होने वाली आगामी विश्व पिकलबॉल चैंपियनशिप के लिए ऑल इंडिया पिकलबॉल एसोसिएशन के अध्यक्ष अरविंद प्रभु को भारत का प्रतिनिधित्व करने आले 16 खिलाड़ियों के साथमुंबई से वियतजेट की उड़ान भरने वाली फ्लाइट में नही जाने दिया गया। जिसका कारण फ्लाइट में व्हीलचेयर वाले यात्रियों के लिए कोई नीति नहीं होना था।

दरअसल, व्हीलचेयर की मदद से चलने वाले ऑल इंडिया पिकलबॉल एसोसिएशन के अध्यक्ष अरविंद प्रभु 35 साल पहले एक कार दुर्घटना के बाद गर्दन के नीचे लकवे का शिकार हो गए थे जिस कारण वह चलने में असमर्थ हैं।

प्रभु ने सोमवार को नागरिक उड्डयन मंत्रालय को अपनी दुर्दशा का वर्णन करते हुए लिखा, "मैंने खुद को एक दिव्यांग यात्री के रूप में पंजीकृत किया था और अपनी उड़ान की बुकिंग के दौरान व्हीलचेयर सहायता का अनुरोध भी किया था। जब उनके पास ये सब सुविधाएं नहीं हैं, तो बुकिंग के वक्त उनके पास ये विकल्प क्यों है और बुकिंग के समय ही मुझे सूचित क्यों नहीं किया गया।"

प्रभु ने आरोप लगाया कि यह पहली बार है जबकि एयरलाइन ने 'व्हीलचेयर वाले यात्रियों के लिए कोई नीति नहीं होने' के आधार पर उन्हें बोर्डिंग पास देने से इनकार कर दिया।

इतना ही नहीं प्रभु को एयरपोर्ट पर मौजूद वह व्हीलचेयर भी मुहैया नहीं कराई गई जिसका उपयोग दिव्यांग यात्रियों को अपने स्वयं के व्हीलचेयर से बोर्डिंग और डिप्लेनिंग के दौरान सीट तक ले जाने के लिए किया जाता है।

उन्होंने कहा,"एयरलाइन के स्टाफ को यह बताने के बावजूद कि मैं किसी अन्य एयरलाइन से गलियारे की कुर्सी के लिए भुगतान करने के लिए तैयार हूं या मेरे चार निजी परिचारक मुझे सीट पर उठा सकते हैं, एयरलाइन ने मेरे दोनों अनुरोधों को यह कहते हुए ठुकरा दिया कि वे आपात स्थिति में मुझे संभालने के लिए तैयार नहीं हैं।"

मुंबई उप-नगरीय टेबल टेनिस एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रभु ने कहा कि एक खेल प्रशासक के रूप में पिछले कई वर्षों से दुनिया भर में यात्रा करने के दौरान उन्हें अपनी दिव्यांगता के कारण कभी भी ऐसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ा।

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