गुरूवार, अक्टूबर 1, 2020
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बिहार के नेशनल स्तर के तैराक गोपाल यादव सड़क पर चाय बेचने को मजबूर

बिहार के राज्य स्तर के तैराक रह चुके गोपाल यादव को अपनी गुजर-बसर करने के लिए चाय की दुकान चलानी पड़ रही है। इससे भी बड़ी बात यह है कि उन्होंने अपनी चाय की दुकान का नाम नेशनल तैराक टी-स्टाल रखा है। वह तैराकी में कई पदक भी जीत चुके हैं और उन्होंने अपने जीते हुए सभी पदक अपनी दुकान में ही टांगे हुए हैं।

गोपाल पटना के काजीपुर में चाय की दुकान लगाते हैं। इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि राष्ट्र स्तर के खिलाड़ी भी भ्रष्ट व्यवस्था के आगे कितने लाचार हैं। गोपाल ने बताया कि उन्होंने कई जगहों पर नौकरी के लिए आवेदन किया लेकिन सभी को रिश्वत चाहिए थी, जिसकी वजह से उन्हें नौकरी नहीं मिल पाई। इसके अलावा उन्होंने यह भी बताया कि उनके दोनों लड़कों को अच्छी तैराकी आती है लेकिन उन्होंने अपने पापा की आर्थिक स्थिति देखकर तैराकी नहीं करने का फैसला किया है। हालांकि उन्होंने अपने अंदर के तैराक को जिन्दा रखा है और वह गंगा में अभी भी तैराकी सिखा रहे हैं।

गौरतलब है कि साल 1987 में उन्होंने अपनी पहली बार कोलकाता में आयोजित हुई तैराकी प्रतियोगिता में बिहार का प्रतिनिधित्व किया था। इसके बाद उन्होंने 1988 और 1989 में केरल में खेली गई प्रतियोगिता में भी भाग लिया था। इसके अलावा वह 1988 में बीसीए दानपुर में खेली गई चैंपियनशिप प्रतियोगिता में बैकस्ट्रोक प्रर्तिस्पर्धा में पहले स्थान पर रहे। इसके बाद उन्होंने 1990 में डाक विभाग की नौकरी के लिए इंटरव्यू भी दिया हालांकि उन्हें नौकरी नहीं मिली थी। वह भ्रष्ट व्यवस्था के आगे लाचार दिखे।