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राष्ट्रीय खेल

National Games 2022: हमें खेल को लोकप्रिय बनाने के लिए और आइकन की जरूरत है - जिमनास्टिक जज दीपक काबरा

चार्टर्ड अकाउंटेंट से स्पोर्ट्स एनालिस्ट बने दीपक काबरा टोक्यो ओलंपिक में अंपायरिंग करने वाले पहले भारतीय जिमनास्टिक जज बने थे

Deepak Kabra Gymnastics
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दीपक काबरा 

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The Bridge Desk

Updated: 2022-10-04T22:18:48+05:30

चार्टर्ड अकाउंटेंट से स्पोर्ट्स एनालिस्ट बने दीपक काबरा ने बीते साल टोक्यो ओलंपिक के दौरान इतिहास रच दिया था वह इन प्रतिष्ठित वैश्विक खेल आयोजन में अंपायरिंग करने वाले पहले भारतीय जिमनास्टिक जज बने थे।

एक पूर्व जिमनास्ट, काबरा ने यह पता लगाने के बाद कि उनका खेल करियर कहीं नहीं जा रहा है, अंपायरिंग में हाथ आजमाने की सोची।

सूरत में जन्मे काबरा, जो सामा इंडोर स्टेडियम में 36वें राष्ट्रीय खेलों के मुख्य जज हैं, ने भारतीय जिम्नास्टिक के बारे में बात की और साथ ही यह भी बताया कि और देश में इस खेल को आगे ले जाने के लिए क्या करने की आवश्यकता है।

आप ऑफिशियल क्यों बने? क्या इसलिए कि आपने देखा कि जिम्नास्टिक करियर-उन्मुख खेल नहीं है?

उत्तर- हां, अभी तक, जिम्नास्टिक भारत में कैरियर-उन्मुख खेल नहीं है। बैडमिंटन और कबड्डी में शामिल होने के लिए बहुत लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। युवाओं के लिए इस खेल में करियर के कुछ ही संकेत देखने को मिलते हैं। मैंने अंपायरिंग इसलिए चुना क्योंकि मैं खेल से जुड़े रहना चाहता था।

ओलंपिक में अनुभव कैसा था?

उत्तर- इसमें कोई शक नहीं कि एक भारतीय के रूप में ओलंपिक में जाक कोई भी खुश होगा। लोगों ने मुझे ऐसे देखा जैसे उन्होंने दुनिया के इस हिस्से से किसी को भी अपने बीच में नहीं देखा हो। लेकिन, बाद में सब ठीक हो गया क्योंकि मैं खेलों में सबसे कम उम्र के अंपायरों में से एक था।

इस खेल में अभी किस चीज की सबसे अधिक जरूरत है?

उत्तर- नवोदित जिम्नास्टों के लिए बेहतर कोच और सुविधाएं मिलनी चाहिए। अधिक महत्वपूर्ण रूप से एक आइकन हो, जिसे देखते हुए वे इस खेल में आने जाने के बारे में सोच सकते हैं।

हमारे पास दीपा कर्माकर एक आइकन के रूप में थीं लेकिन उसके बाद कोई नहीं है?

उत्तर- अधिक से अधिक आइकन को सामने आना चाहिए और लोगों के लिए प्रेरणा बने रहना चाहिए। आने और जाने से आप किसी जेनरेशन को प्रेरित नहीं कर सकते। मैं किसी को दोष नहीं देता। दीपा का ओलंपिक अभियान बहुत अच्छा रहा। रियो में चौथा स्थान हासिल करना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि थी। लेकिन विडंबना यह है कि खेल को नियंत्रित करने वाले लोगों में से किसी ने भी इसका फायदा नहीं उठाया।

सभी जिमनास्ट को आपका संदेश?

उत्तर- आप जो भी करते हैं उसमें कलात्मक बनें। जिम्नास्टिक एक कलात्मक अप्रोच है और इससे ही फर्क पड़ेगा।

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