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हॉकी

राष्ट्रमंडल खेलों में हॉकी के फाइनल मुकाबले में नहीं खेल पाना विवेक सागर के लिए था निराशाजनक

विवेक का यह दूसरा राष्ट्रमंडल खेल था, इससे पहले 2018 गोल्ड कोस्ट में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में विवेक टीम के सबसे कम उम्र 17 साल के खिलाड़ी थे

राष्ट्रमंडल खेलों में हॉकी के फाइनल मुकाबले में नहीं खेल पाना  विवेक सागर के लिए था निराशाजनक
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Pratyaksha Asthana

Published: 26 Aug 2022 1:37 PM GMT

बर्मिंघम में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीतने वाली भारतीय पुरुष हॉकी टीम में घुटने की चोट के कारण नहीं खेल पाए मिडफिल्टर विवेक सागर प्रसाद निराश महसूस करते हैं। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले गए फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम को हार का सामना करना पड़ा था और वह स्वर्ण जीतने से चूक गई थी। लेकिन रजत हासिल करके टीम ने भारत की झोली में एक और पदक डाला था।

फाइनल मुकाबले में नहीं खेल पाने से निराश विवेक ने कहा,"मैं ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ राष्ट्रमंडल खेल के फाइनल में नहीं खेलने से निराश था। इतने प्रतिष्ठित टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचना किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ी बात होती है। फाइनल में पहुंचने के लिए एक अच्छा अभियान खेलना और फिर चोट के कारण फाइनल से बाहर होना मेरे लिए निराशाजनक था।"

उन्होंने कहा, मैं वास्तव में उस दिन अपनी टीम के लिए मैदान में रहना चाहता था। हालांकि, स्पोर्ट्स में ऐसा होता है। इसलिए, केवल एक चीज जो हम अभी कर सकते हैं, वह है आगे बढ़ना।

खास बात है कि विवेक का यह दूसरा राष्ट्रमंडल खेल था, इससे पहले 2018 गोल्ड कोस्ट में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में विवेक टीम के सबसे कम उम्र 17 साल के खिलाड़ी थे। तब टीम पदक हासिल नहीं कर पाई थी।

इस पर विवेक ने कहा, 2018 में राष्ट्रमंडल खेलों में मेरा पहला अनुभव था। मैं काफी युवा था और वास्तव में उत्साहित था। लेकिन एक टीम के रूप में यह हमारे लिए निराशाजनक था। इस बार, हम एक अच्छे प्रदर्शन के लिए अड़े थे, लेकिन फिर से, फाइनल में योजना के अनुसार चीजें नहीं हुईं।

फिलहाल कुछ हफ्तों की आराम के बाद विवेक सोमवार को साई, बेंगलुरु में राष्ट्रीय शिविर में शामिल होंगे। जिस पर विवेक ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा,"यह सिर्फ एक मामूली चोट थी। पिछले हफ्तों में आराम करने के बाद, मैं अपने साथियों के साथ शिविर में शामिल होने और जनवरी में भुवनेश्वर और राउरकेला में होने वाले ओडिशा पुरुष हॉकी विश्व कप 2023 की तैयारी शुरू करने के लिए उत्सुक हूं। मुझे यकीन है कि एक बार जब मैं शिविर में शामिल हो जाऊंगा तो टीम के सहयोगी कर्मचारी मेरे कार्यभार की योजना बनाएंगे।"

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