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EXCLUSIVE: मैं दिलीप टिर्की की तरह बनना चाहता हूं: शिलानंद लाकड़ा

EXCLUSIVE: मैं दिलीप टिर्की की तरह बनना चाहता हूं: शिलानंद लाकड़ा
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Deepak Mishra

Published: 23 Oct 2019 8:44 AM GMT

भारतीय पुरूष जूनियर हॉकी टीम के प्रदर्शन में पिछले काफी समय से शानदार उछाल देखने को मिला है। यह टीम देश-विदेश हर जगह लाजवाब प्रदर्शन कर रही है। हाल ही में नौवें सुल्तान जोहोर कप में इस टीम ने फाइनल का सफर तय किया था। पूरे टूर्नामेंट में यह टीम एक चैंपियन की तरह खेली जहां इन्होंने ऑस्ट्रेलिया तक को मात दी।

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हालांकि फाइनल में ग्रेट ब्रिटेन के खिलाफ थोड़ी सी कमी रहने की वजह से टीम को हार का सामना करना पड़ा। फाइनल में भारत को ग्रेट ब्रिटेन के हाथों 1-2 से हार मिली थी। इस टूर्नामेंट में भारत के लिए शानदार प्रदर्शन करने वाले फारवर्ड खिलाड़ी शिवानंद लाकड़ा के भारत लौटने पर द ब्रिज हिन्दी ने उनसे खास बातचीत की। इस बातचीत में द ब्रिज ने शिलानंद से उनके प्रतियोगिता से हासिल होने वाले अनुभव, टीम में कमियां और उनके आगामी भविष्य के बारे में सवाल किए।

भारतीय जूनियर हॉकी टीम

सवाल- आपके लिए कैसी रही प्रतियोगिता और क्या कुछ सीखने को मिला ?

शिलानंद लाकड़ा: काफी अच्छी रही प्रतियोगिता जहां मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला। दबाव वाले मैच में कैसे खेलें और मुश्किल समय में कैसे गोल करें ये सीखा। 2017 और 2018 में भी मैं भारतीय टीम का हिस्सा था, जिसका अनुभव मैंने इस प्रतियोगिता में इस्तेमाल किया ।

सवाल- कहां कमियां रह गईं जिस वजह से भारत इतिहास रचते-रचते रह गया ?

शिलानंद लाकड़ा: कमियां तो कुछ नहीं थी, हर मुकाबले में एक लक्ष्य लेकर हम खेल रहे थे। जिसपर कई बार सफलता मिली और कई बार नहीं। पेनाल्टी कॅार्नर अगर सही समय पर कन्वर्ट होते तो शायद परिणाम कुछ और होता। लेकिन कोई बात नहीं हम आगे और अच्छा खेलने की पूरी कोशिश करेंगे।

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सवाल- हर खिलाड़ी का कोई ना कोई हीरो होता है आप किसी खिलाड़ी को अपना आदर्श मानते हैं ?

शिलानंद लाकड़ा: दिलीप टिर्की मेरे आदर्श हैं । जब से मैंने खेलना शुरू किया था, तबसे मैं उनके खेल से काफी प्रभावित रहा और बहुत कुछ सीखा कि कैसे हर लक्ष्य को हासिल करते हैं। साथ ही मुश्किल समय में धैर्य नहीं छोड़ते। मैं चाहता हू कि आगे मैं उन्ही की तरह खिलाड़ी बनूं ।

सवाल- ओडिशा में हॅाकी के बारे में बात करें तो विश्वकप के आयोजन से वहां पर इस खेल को लेकर रोमांच बढ़ गया है। उस बारे में क्या कहना चाहेंगे?

शिलानंद लाकड़ा : ओडिशा में हॅाकी पहले से ही लोकप्रिय है, लेकिन हॅाकी विश्वकप के आयोजन के बाद वहां पर इस खेल को लेकर लोगों की मानसिकता काफी बदली है । आज कई ओड़िया हॅाकी खिलाड़ी बनना चाहते हैं । अगर इसी तरह अतंराष्ट्रीय प्रतियोगिता का आयोजन वहां होता रहा तो वो दिन दूर नहीं जब ओडिशा भारत में हॅाकी का मक्का कहलाने लगेगा।

सवाल- सीनियर टीम में खेलने को लेकर आप कुछ सोच रहे हैं ?

शिलानंद लाकड़ा: सीनियर टीम में खेलने को लेकर अभी मेरे मन में कुछ नहीं है । मैं अपने बेसिक पर काम कर रहा हूं । मैं चुनौतियों के हिसाब से तैयारियां करता हूं । सीनियर खेलना लक्ष्य है लेकिन अभी इस बारे में कुछ नहीं सोच रहा।

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