मंगलवार, सितम्बर 22, 2020
होम विशेष हॉकी: अजलान शाह कप में कोच के बिना प्रदर्शन करने की टीम...

हॉकी: अजलान शाह कप में कोच के बिना प्रदर्शन करने की टीम इंडिया पर चुनौती !

भारतीय हॉकी में एक सिक्के के दो पहलू है। इस टीम के कोच का बदलते रहना आम सी बात हो गई है। हॉकी वर्ल्ड कप 2018 में नाकामयाबी के बाद कोच हरेंद्र सिंह को टीम से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। हाल ही में मलेशिया में होने वाले अजलान शाह कप के लिए टीम की घोषणा कर दी गई है। इस टीम की कमान मनप्रीत सिंह को सौंपी गई है।

इस टीम से कई अनुभवी खिलाड़ी बाहर हैं। वहीं उनकी जगह युवा खिलाड़ियों को टीम में चुना गया है जबकि टीम का कोच अब तक चुना नहीं गया है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि मनप्रीत की अगुवाई में टीम मलेशिया के इपोह में बिना कोच के ही अजलान शाह कप में खेलते हुए दिखाई देगी।

जाहिर है हॉकी इंडिया को इस मामले को बेहद ही गंभीरता से लेने की जरूरत थी। अनुभवी खिलाड़ियों की अनुपस्थिति में टीम युवाओं के भरोसे मलेशिया जा रही है। जहां भारत को जीत के लिए जापान और कनाडा जैसी टीमों से भिड़ना है। ऐसे में हॉकी इंडिया पर सवाल उठना लाजमी है कि क्या इस टीम में आने वाले कोच अपने चार साल पूरे कर भी पायेंगे या नही। अगर ऐसा नहीं होता है तो क्या पिछले 10 वर्षों से चले आ रहे कोच के फेरबदल का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।

गौरतलब है भारत को मार्च में अजलान शाह कप बिना कोच के खेलना है। इसके बाद टीम इंडिया को ओलंपिक में क्वालीफिकेशन के लिए भुवनेश्वर में खेलना है।

साल 2019 भारत के लिए बेहद अहम है, अगले वर्ष 2020 टोक्यो ओलंपिक में भी टीम इंडिया को हिस्सा लेना है। इसके बावजूद विदेशी कोच की खोज में हॉकी इंडिया किसी भारतीय कोच की तरफ देखने के बारे में सोच भी नही रही है।

सोचने वाली बात ये है की साल 2010 से लगभग दस कोच बदले जा चुके है। 2018 भुवनेश्वर वर्ल्ड कप में टीम को छठे स्थान पर पहुंचाने वाले कोच हरेंद्र सिंह को भी अब बाहर किया जा चुका है। भारतीय हॉकी टीम का बिना कोच के मलेशिया जाना पूर्व भारतीय कप्तान और मेजर ध्यानचंद के पुत्र अशोक कुमार के लिए अजूबे की तरह है।

1975 वर्ल्ड कप विजेता टीम के सदस्य अशोक कुमार ने द ब्रिज से खास बातचीत में कहा कि ‘आज के समय में इतने नियमों में किसी टीम का बिना कोच के टूर्नामेंट के लिए जाना किसी अजूबे की तरह है। टूर्नामेंट में टीम में अनुभवी खिलाड़ियों के होने से भले ही युवा खिलाड़ियों को सहायता मिल जाए लेकिन बिना कोच के टीम में अनुशासन रखना काफी मुश्किल होता है, और मलेशिया में इसकी कमी खल सकती है’।

याद रहे की अजलान शाह कप में भारतीय दल से अनुभवी खिलाड़ी चोट की वजह से पहले ही नदारद हैं। इस वजह से टीम में अनुशासन और रणनीति बनाने का जिम्मा कप्तान मनप्रीत सिंह के उपर है।

भारतीय टीम के कोच का लगातार बदले जाना काफी सवाल खड़े करता है। पिछले कुछ सालों पर नजर डालें तो रोलैंट ऑल्टमेंस के अलावा किसी भी कोच ने भारतीय टीम में ज्यादा समय नहीं बिताया है। टैरी वॉल्स, शोर्ड मारिन या फिर हरेंद्र सिंह सबके उपर अच्छे नतीजे ना देने के आरोप डालकर टीम से बाहर कर दिया गया है। द ब्रिज के साथ खास बातचीत में अशोक कुमार ने कहा कि ‘जब तक हॉकी इंडिया में पैसे का खेल जारी रहेगा तब तक आपको ऐसा ही देखने को मिलेगा। इस समय किसी भी कोच को उसके नतीजों को देखकर रखा या हटाया जाता है। उस कोच के बारे में यह नहीं देखा जाता कि उसने अपने कार्यकाल में कितने खिलाड़ियों को बेहतर बनाया। उसने टीम के अंदर किस तरह का बेहतर माहौल पैदा किया। उसे तो बस यह कहकर हटा दिया जाता है कि आपने बेहतर रिजल्ट नहीं दिया।

हॉकी इंडिया के लिए इस समय कर्ताधर्ता का काम डेविड जॉन कर रहे है। हॉकी वर्ल्ड कप में खराब प्रदर्शन के बाद हरेंद्र सिंह को जब से टीम से बाहर किया गया है,उसके बाद से टीम के हाई पर्फार्मेंस डायरेक्टर डेविड जॉन को टीम का अंतरिम कोच समझ लिया जाना गलत नहीं होगा। अशोक कुमार के मुताबिक ‘हॉकी इंडिया ने वर्ल्ड कप की नाकामयाबी को लेकर हरेंद्र सिंह को हटाकर शायद गलत किया है। हरेंद्र भारत को 2016 में जूनियर वर्ल्ड कप दिला चुके है। वो काफी लंबे समय से इस टीम के साथ जुड़े हुए हैं जिसकी वजह से हरेंद्र को अभी नहीं हटाया जाना चाहिए था, बल्कि उन्हें और मौके देने की जरूरत थी’।

जाहिर है हॉकी इंडिया की तरफ से कोच की नियुक्ति करना बेहद जरूरी है। इसके उपर जल्द से जल्द फैसला लिए जाने की जरूरत है। टीम को किसी विदेशी या देशी कोच से ज्यादा ऐसे व्यक्ति की जरूरत है, जो टीम के साथ लंबा समय बिताएं और इस टीम को जीत की राह पर ला सकें। 2020 टोक्यो वर्ल्ड कप के लिए काउंटडाउन शुरू हो चुका है। अगर भारतीय हॉकी को 1980 के बाद से ओलंपिक में जीत का सूखा खत्म करना है तो अच्छा प्रदर्शन करने की जरूरत है और यह तभी संभव हो सकता है जब इस टीम के कोच, कप्तान और खिलाड़ी के बीच संतुलन सही मात्रा में बैठे।