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वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप: क्या अंपायर के ग़लत फ़ैसले ने बजरंग से स्वर्ण पदक जीतने का मौक़ा छीना ?

वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप: क्या अंपायर के ग़लत फ़ैसले ने बजरंग से स्वर्ण पदक जीतने का मौक़ा छीना ?
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Syed Hussain

Published: 19 Sep 2019 4:02 PM GMT

गुरुवार का दिन वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में भारत के लिए उम्मीदों से भरा था, जिसमें सब से ज़्यादा उम्मीद थी मेंस फ़्री स्टाइल में 65 किग्रा वर्ग वर्ल्ड नंबर-1 बजरंग पूनिया से। बजंरग ने शुरुआत भी धमाकेदार अंदाज़ में करते हुए भारतीय फ़ैंस को जोश से लबरेज़ कर दिया था, जब उन्होंने पहला मुक़ाबला पोलैंड के पहलवान से 9-2 से जीतते हुए इरादे साफ़ कर दिए थे।

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बजंरग का सफ़र बेहद आसानी से सेमीफ़ाइनल तक पहुंच गया था, जहां उनके सामने घरेलू देश यानी कज़ाख़स्तान के पहलवान दौलेत नियाज़बेकोव थे। नियाज़ के ख़िलाफ़ हुए इस मैच को जिसने जिसने देखा वह ये समझ सकता है कि बजरंग न तो फ़ैसले से ख़ुश थे और न ही रेफ़री के रवैये से। भारत को रियो ओलंपिक में पदक दिलाने वाले योगेश्वर दत्त भी रेफ़री और ख़राब अंपायरिंग पर अपना ग़ुससा ट्विटर के ज़रिए निकाला।

https://twitter.com/DuttYogi/status/1174664014141382656?s=20

इस मुक़ाबले में बजंरग ने शुरुआत में 2 अंकों की बढ़त नियाज़ को दे दी थी, लेकिन इसके बाद कज़ाख़स्तान के पहलवान ने इसे आगे बढ़ाते हुए 4 प्वाइंट्स एक साथ ले लिए। और यही इस मैच का और विवाद का कारण बन गया। दरअसल, जो 4 अंक रेफ़री ने नियाज़ को दिए थे उसके लिए बजरंग ने चैलेंज करते हुए अपनी बात रखी कि इसकी शुरुआत उन्होंने की थी यानी उस मूव के लिए अंक कज़ाख़स्तानी पहलवान को नहीं बल्कि भारतीय पहलवान को मिलना चाहिए था। लेकिन बजरंग का ये चैलेंज रिजेक्ट कर दिया गया और अंक नियाज़ को ही मिला। समय अब कम बचा था और यहां से बजरंग ने काफ़ी आक्रामक रुख़ अख़्तियार किया और वापसी करते हुए मुक़ाबला 9-9 की बराबरी पर ले आए थे। लेकिन नियाज़बेकोव को नियमानुसार जीत दे दी गई।

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क्योंकि नियम के मुताबिक़ इस मैच में सबसे ज़्यादा 4 प्वाइंट्स एक मूव में कज़ाख़स्तानी पहलवान को मिले थे, इसलिए 9-9 से टाई होने के बाद उस आधार पर जीत उन्हें मिली। लेकिन बजरंग और भारतीय प्रेमियों को यही लगा कि वह 4 अंक बजरंग को मिलने चाहिए थे न कि नियाज़ को, हालांकि बजरंग के पास एक और मौक़ा है जब वह शुक्रवार की शाम कांस्य पदक के लिए मैट पर उतरेंगे।

लेकिन अंपायर और रेफ़री के इस विवादास्पद फ़ैसले ने एक सवाल ज़रूर खड़ा कर दिया है कि क्या ख़राब फ़ैसले ने बजरंग पूनिया से स्वर्ण पदक छीन लिया ?

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