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वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप: बजरंग पूनिया का लगातार दूसरा पदक, ऐसा करने वाले पहले भारतीय बन रचा इतिहास

वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप: बजरंग पूनिया का लगातार दूसरा पदक, ऐसा करने वाले पहले भारतीय बन रचा इतिहास
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Syed Hussain

Published: 20 Sep 2019 1:28 PM GMT

शुक्रवार को कज़ाख़स्तान के नूर-सुल्तान में खेले जा रहे वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में बजरंग पूनिया ने भारत को दूसरा पदक दिलाया। बजरंग ने 65 किग्रा वर्ग में मंगोलिया के पहलवान तुल्का तुमुर ओचिर को हराकर कांस्य जीता। तुमुर को इस वर्ल्ड चैंपियनशिप में चौथी वरीयता हासिल थी। इसके साथ ही बजंरग पूनिया ने लगातार दो वर्ल्ड चैंपियनशिप में पदक जीतने वाले पहले भारतीय पहलवान भी बन गए हैं। बजरंग शुरुआत में 0-6 से पीछे हो गए थे और फिर वहां से वापसी करते हुए बजरंग ने मंगोलियाई पहलवान पर 8-6 की बढ़त बना ली थी, हालांकि आख़िरी मिनटों में एक अंक तुमुर को ज़रूर मिला लेकिन 8-7 से मुक़ाबला जीतते हुए बजरंग ने इतिहास रच दिया।

बजंरग को 2018 बूडापेस्ट वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में भी रजत पदक मिला था। जबकि 2013 वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में भी बजरंग ने कांस्य जीता था। इस तरह से बजंरग पूनिया ने वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में तीसरा पदक हासिल किया।

बजरंग पूनिया ने 2018 वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में जीता था रजत पदक

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इससे पहले बजंरग का सफ़र बेहद आसानी से सेमीफ़ाइनल तक पहुंच गया था, जहां उनके सामने घरेलू देश यानी कज़ाख़स्तान के पहलवान दौलेत नियाज़बेकोव थे। नियाज़ के ख़िलाफ़ हुए इस मैच को जिसने जिसने देखा वह ये समझ सकता है कि बजरंग न तो फ़ैसले से ख़ुश थे और न ही रेफ़री के रवैये से। बजरंग पूनिया के कोच और भारत को रियो ओलंपिक में पदक दिलाने वाले योगेश्वर दत्त भी रेफ़री और ख़राब अंपायरिंग पर अपना ग़ुससा ट्विटर के ज़रिए निकाला।

https://twitter.com/DuttYogi/status/1174664014141382656?s=20

इस मुक़ाबले में बजंरग ने शुरुआत में 2 अंकों की बढ़त नियाज़ को दे दी थी, लेकिन इसके बाद कज़ाख़स्तान के पहलवान ने इसे आगे बढ़ाते हुए 4 प्वाइंट्स एक साथ ले लिए। और यही इस मैच का और विवाद का कारण बन गया। दरअसल, जो 4 अंक रेफ़री ने नियाज़ को दिए थे उसके लिए बजरंग ने चैलेंज करते हुए अपनी बात रखी कि इसकी शुरुआत उन्होंने की थी यानी उस मूव के लिए अंक कज़ाख़स्तानी पहलवान को नहीं बल्कि भारतीय पहलवान को मिलना चाहिए था। लेकिन बजरंग का ये चैलेंज रिजेक्ट कर दिया गया और अंक नियाज़ को ही मिला। समय अब कम बचा था और यहां से बजरंग ने काफ़ी आक्रामक रुख़ अख़्तियार किया और वापसी करते हुए मुक़ाबला 9-9 की बराबरी पर ले आए थे। लेकिन नियाज़बेकोव को नियमानुसार जीत दे दी गई।

लेकिन फिर भी बजरंग का ये कांस्य पदक काफ़ी मायने रखेगा, क्योंकि अब वह टोक्यो ओलंपिक के लिए भी क्वालिफ़ाई कर गए हैं। इससे पहले महिला पहलवान विनेश फ़ोगाट ने भी रेपेचेज राउंड के ज़रिए भारत को कांस्य पदक दिलाया था। जबकि साक्षी मलिक और सुशील कुमार जैसे दिग्गज और बड़े नाम इस टूर्नामेंट में अपना पहला ही मैच हारकर बाहर हो गए।

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