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ला अल्ट्रा लद्दाख़ 555 किमी मैराथन: दुनिया की सबसे ख़तरनाक मैराथन में से एक को पूरा करने वाले आशीष बने पहले भारतीय

ला अल्ट्रा लद्दाख़ 555 किमी मैराथन: दुनिया की सबसे ख़तरनाक मैराथन में से एक को पूरा करने वाले आशीष बने पहले भारतीय
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Syed Hussain

Published: 25 Aug 2019 7:43 AM GMT

आप जो पढ़ने जा रहे हैं उसे पढ़ने से पहले ये जानना आपको बेहद ज़रूरी है कि ये कोई आम मैराथन नहीं है, ये 555 किमी लंबी मैराथन है जिसे ख़राब मौसम, 18000 फ़ीट ऊंची चढ़ाई और -25 डिग्री सेल्सियस पर बर्फ़ों के बीच दौड़ना होता है। यही वजह है कि आज से पहले किसी भी भारतीय ने इसे पूरा नहीं किया था लेकिन इस बार भारत के आशीष कासोडेकर ने इसे सच कर दिखाया और पूरा कर लिया।

555 किमी की मैराथन पूरा करने वाले आशीष कासोडेकर पहले भारतीय

ला अल्ट्रा द हाई के नाम से होने वाली इस ख़तरनाक मैराथन का ये 10वां सीज़न था, जिसे आशीष ने 126 घंटे 18 मिनट में पूरा करते हुए मैराथन में तीसरे नंबर पर रहे। इस मैराथन को जीता ऑस्ट्रेलिया के जेसन रियरडन जिन्होंने 555 किमी लंबे मैराथन को 120 घंटे 19 मिनट में पूरा किया और इतने कम समय में ऐसा करने वाले वह दुनिया के पहले इंसान बन गए हैं। इस मैराथन को अमेरिका के मैथ्यू मैडे ने 123 घंटे 35 मिनट में कंपलीट किया और इस फ़ेहरिस्त में वह तीसरे नंबर पर रहे।

अब आपको बताते हैं इसके क्या नियम थे और क्यों इसे माना जाता है दुनिया के सबसे ख़तरनाक मैराथन में से एक। दरअसल, इसे ख़तरनाक बनाता है इसके बेहद कठिन माहौल और मौसम। धावकों को 5 में से कोई एक दूरी तय करनी होती है, जैसे कि 55 किमी, 111 किमी, 222 किमी, 333 किमी और 555 किमी। धावकों ने अपने हिसाब से इसे चुना और फिर रणनीति के साथ दौड़ना शुरू किया लेकिन मौसम का भी इसको लेकर कुछ अपना प्लान था। शुरुआत में ही नुब्रा वैली के पास तेज़ बारिश होने लगी और ये क़रीब 40 किमी तक चलती रही। इसके बाद अगले 60 किमी तक बर्फ़बारी ने धावकों की दौड़ और मुश्किल कर दी। जो देखते ही देखते बर्फ़ के कीचड़ में बदल चुका था और यहां दौड़ना क़रीब क़रीब नामुमकिन हो चला था। क्योंकि अब ऊंचाई 17700 फ़िट हो चुकी थी और आगे मैराथन को जारी रखना कई धावकों के बस के बाहर की बात थी।

17700 फ़िट की ऊंचाई और -25 डिग्री सेल्सियस ने धावकों के लिए दौड़ पूरी करना बना दिया था नामुमकिन

अब सांस लेने में भी दिक़्कतें होने लगीं थी और तापमान -25 डिग्री तक पहुंच चुका था जिसे चल रही तेज़ ठंडी हवाओं ने -40 वाले ठंग में तब्दील कर दिया था। नतीजा ये हुआ कि आधे से ज़्यादा धावकों ने अपनी फ़िनिश लाइन को भी पूरा नहीं किया। 40 में 29 धावकों ने 55 किमी की दौड़ पूरी करी, 19 में सिर्फ़ 10 धावकों ने 111 किमी की दौड़ कंपलीट करने में क़ामयाब रहे। 9 में से सिर्फ़ एक ही धावक ने अपनी 222 किमी की दौड़ को सफलतापूर्वक अंजाम दिया था। जबकि 333 किमी में दौड़ने वाले दो में से किसी भी धावक ने इसे पूरा नहीं किया।

लेकिन जिस दौड़ में भारत के आशीष थे यानी 555 किमी में सिर्फ़ 3 ही धावकों ने दौड़ पूरी की, जिसका कट ऑफ़ टाइम 132 घंटे रखा गया था। इस तरह से आशीष ने वह कर दिखाया जहां आज तक कोई भी भारतीय नही पहुंच पाया था।

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