शुक्रवार, सितम्बर 25, 2020
होम खिलाड़ी और राजनीति EXCLUSIVE: अनुराग कश्यप बेवक़ूफ़ हैं, शूटर्स दादियां और सीमा पैसों की लालची...

EXCLUSIVE: अनुराग कश्यप बेवक़ूफ़ हैं, शूटर्स दादियां और सीमा पैसों की लालची हैं !

हाल ही में प्रकाशी तोमर और चंद्रो तोमर की ज़िंदगी पर बनी फ़िल्म ‘सांड की आंख’ प्रदर्शित हुई जिसके बाद शूटर्स दादियों को एक बार फिर सुर्ख़ियों में ला दिया। लेकिन प्रकाशी और चंद्रो को ढूंढ कर निकालने वाले और उन्हें शोहरत दिलाने वाले डॉ राजपाल सिंह का इस फ़िल्म में असली नाम तक सामने नहीं आया। जो हैरान कर देने वाला था, इसी बात को गहराई से जानने के लिए द ब्रिज हिन्दी के कंटेंट हेड सैयद हुसैन ने पहले प्रकाशी तोमर की बेटी सीमा तोमर से बात की थी, जिनके ख़ुलासे ने हैरान कर दिया था। क्योंकि सीमा तोमर का आरोप था कि डॉ राजपाल दादियों की शोहरत को सहन नहीं कर पाए और उनसे रिश्ता ख़त्म कर दिया था, इसलिए फ़िल्म में भी उनके नाम का इस्तेमाल नहीं किया गया।

EXCLUSIVE: सीमा तोमर का डॉ राजपाल पर लगाया गया आरोप आप यहां पढ़ सकते हैं

इसके बाद ये बेहद ज़रूरी हो गया था कि हम डॉ राजपाल सिंह से उनकी राय जानें, हमने बात करने की कोशिश करी तो पता चला कि वह भारत में नहीं हैं और अमेरिका गए हुए हैं। लेकिन उनसे आख़िरकार संपर्क हुआ और उन्होंने जो बातें रखीं, वह और भी ज़्यादा हैरान कर देने वाली हैं। डॉ राजपाल ने न सिर्फ़ सीमा तोमर के लगाए आरोपों को झूठा और निराधार बताया बल्कि उन्होंने ‘सांड की आंख’ के निर्देशक अनुराग कश्यप को भी कटघरे में खड़ा कर दिया और उन्हें बेहद बेवक़ूफ़ करार दिया।

”सीमा तोमर ने बिल्कुल झूठ बोला है, मैं क्यों दादी को मना करूंगा ? और मुझे दादियों से मतलब क्या है, मुझे बच्चों को आगे बढ़ाने की ललक है। मेरे अंदर से 40 से ज़्यादा बच्चे निकलकर आए हैं जिन्होंने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शूटिंग में हिस्सा लिया है। मेरा काम बच्चों को तैयार करके भारतीय आर्मी, BSF और एयरफ़ोर्स में भेजना है ताकि उनका करियर भी बने और देश की सेवा के लिए अच्छी प्रतिभाएं जाएं। हां, इनको मैंने इस बात के लिए ज़रूर मना किया वह जोहरी अकादमी के अंदर किसी तरह से वीडियोग्राफ़ी न करें या करवाएं, क्योंकि इससे हमारे बच्चों की ट्रेनिंग बंद हो जाती है। साथ ही साथ वह हमारा और अकादमी का नाम भी बदनाम करती थीं। एक बार जापान से एक टीम आई थी जो डॉक्यूमेंट्री बनाना चाहती थी, मैं गांव से बाहर था लेकिन मैंने इजाज़त दे दी थी। प्रकाशी और चंद्रो उन्हें लेकर मेरी अकादमी में आ गईं और दिन भर शूटिंग कराई और फिर मुझे पता चला कि इसके लिए उन्होंने उनसे लाखों रुपये भी ले लिए। जिसके बाद मैंने किसी तरह की शूटिंग और इंटरव्यू अपने जोहरी अकादमी में मना कर दिया था, क्योंकि इससे मेरी बदनामी हो रही थी।” : डॉ राजपाल सिंह, संस्थापक, जोहरी राइफ़ल क्लब

EXCLUSIVE: जानिए ‘सांड की आंख’ का खेल के नज़रिए से कैसा रहा था रिव्यू

इतना ही नहीं फ़िल्म में अपना नाम न होने और उन्हें जिस श्रेय की ज़रूरत थी वह न मिल पाने से डॉ राजपाल बेहद निराश भी हैं, साथ ही साथ फ़िल्म में कई तरह की झूठी बातों से वह भी परेशान हैं और इसके लिए वह सीधे सीधे फ़िल्म के निर्देशक अनुराग कश्यप को ज़िम्मेदार ठहराते हैं।

”अनुराग कश्यप फ़िल्म बनाने से पहले गांव आए तो वह मुझसे मिले तक नहीं, मुझे तो इस बात की हैरानी होती है कि अनुराग कश्यप जैसा बड़ा निर्देशक इतना बेवक़ूफ कैसे ? उसने इन दादियों के सारे झूठ को सच मान लिया, ये भी नहीं देखा कि न ये अंतर्राष्ट्रीय शूटर हैं और न ही राष्ट्रीय स्तर की शूटर। साथ ही साथ जो उन्होंने फ़िल्म में 700 मेडल जीतते हुए दिखाए, वह बिल्कुल बकवास है। पूरी ज़िंदगी में कोई शानदार से शानदार शूटर 70 मेडल भी नहीं जीत सकता और 700 मेडल का इतना बड़ा झूठ। अनुराग ने कभी मुझसे बात नहीं की, जबकि मुंबई में तापसी पन्नु को जिन्होंने शूटिंग सिखाई वह मेरे बेहद क़रीबी दोस्त हैं जिनका नाम डॉ शिन्दे है, उन्होंने मेरे बारे में अनुराग कश्यप को सब बताया भी फिर भी अनुराग ने मुझसे बात नहीं करी। फ़िल्म में अहम भूमिका निभाने वाले जाने माने निर्देशक, निर्माता और अभिनेता प्रकाश झा भी गांव में मौजूद थे और वह भी मुझे अच्छे से जानते हैं लेकिन उन्होंने भी मुझसे बात तक नहीं करी। ऐसा लगता है मानो अनुराग कश्यप ने बस पैसों की वजह से अपनी आंखें बंद कर ली,  हालांकि मैं ये ज़रूर कहूंगा मेरा किरदार जो पर्दे पर विनीत कुमार सिंह ने यशपाल की भूमिका में निभाया है, वह सही है।” : डॉ राजपाल सिंह, संस्थापक, जोहरी राइफ़ल क्लब

डॉ राजपाल ने इसके साथ ही साथ ये भी कहा कि अनुराग कश्यप पहले इंसान नहीं थे जो इन दादियों पर फ़िल्म बनाना चाहते थे, बल्कि उनसे पहले भी एक शख़्स ने गांव आकर उनसे मुलाक़ात करी थी लेकिन फिर दादियों के रवैये की वजह से उन्होंने अपना नाम वापस ले लिया।

”ये फ़िल्म पहले एक दूसरे शख़्स बनाना चाहते थे जिनका नाम संजीवन था, जो गांव भी आए थे और मुझसे भी मिले थे, उनको लेकर मैं दादियों के पास गया। फिर बात हुई और संजीवन ने बोला कि मैं आपको भी पैसे दूंगा, लेकिन मैंने मना कर दिया था कि नहीं मैं नहीं लूंगा बल्कि मैं उसे शूटिंग रेंज में ही लगा दूंगा। लेकिन दादियों ने कहा कि नहीं हमें तो सारा पैसा चाहिए, तो फिर मैंने कह दिया कि मुझे इसमें कोई इंट्रेस्ट नहीं है और मैं पीछे हट गया था। अगर मैं पैसा लेता और इन चीज़ों में पड़ता तो मेरा मिशन फ़ेल हो जाता, इसलिए मैंने ख़ुद को हटा लिया। : डॉ राजपाल सिंह, संस्थापक, जोहरी राइफ़ल क्लब

डॉ राजपाल सिंह के इन ख़ुलासों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, और साथ ही साथ बॉलीवुड फ़िल्म इंडस्ट्री एक बार फिर ख़राब रिसर्च वर्क और तालमेल की कमियों के लिए निशाने पर है।