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बास्केटबॉल

क्या एनबीए मुकाबलों का आयोजन भारतीय बास्केटबॅाल को विकास की पटरी पर दोबारा लाएगा?

क्या एनबीए मुकाबलों का आयोजन भारतीय बास्केटबॅाल को विकास की पटरी पर दोबारा लाएगा?
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Lakshmi Kant Tiwari

Updated: 2022-04-25T01:48:05+05:30

4 और 5 अक्टूबर 2019 को एनबीए भारत की औद्योगिक राजधानी मुंबई में स्थित नेशनल स्पोर्टस क्लब आफ इंडिया में प्रदर्शन मुकाबलों का आयोजन करने वाला है। बता दें कि ये मैच इंडियाना पेसर्स और सक्रेमेंटो किंग्स के बीच खेला जाएगा। साथ ही हम आपको ये भी बताना चाहेंगे कि किंग्स का मालिकना अधिकार भारतीय मूल के अमेरिकी उधोगपति विवेक रनादीव के पास है। जो मायानगरी मुंबई से ताल्लुक रखते हैं। रानादीव का हमेशा से ये सपना था की वो अपने देश में एनबीए मुकाबलों का आयोजन करवाएं और देखिए आज ये सपना सोच हो गया। 2015 में सक्रेमेंटो किंग्स के मालिक और एनबीए कमीश्नर एडम सिल्वर रिलायंस-एनबीए द्वारा आयोजित एक प्रशिक्षण शिविर के लिए मुंबई आए थे।

जहां पर रनादीव ने बात ही बातों में सिल्वर से कहा था की मेरा सपना है भारत में एनबीए मुकाबले का आयोजन कराने का, तो इसपर एनबीए कमीश्नर का जवाब आया था, कुछ ऐसा ही मेरा भी सपना है और हम बहुत जल्द ही ऐसा करने में कामयाब होंगे और देखिए आज वो सपना सच होने जा रहा है। रानादीव ने ना ही सिल्वर के साथ बल्कि इस बात का जिक्र अमेरिका के उस समय के राष्ट्रपति बाराक ओबामा के साथ भी किया था। जिन्हें इस खेल के साथ काफी लगाव है। ओबामा कई बार एनबीए और अमेरिका की राष्ट्रीय टीम की मेजबानी भी कर चुके हैं। दरअसल एनबीए काफी समय से भारत में इन मुकाबलो का आयोजन कराना चाह रहा था। लेकिन बेहतर सुविधा ना होने के वजह से वो ऐसे कर नहीं पा रहा था।

सुविधा आज भी बेहतर नहीं है लेकिन सतनाम और अमज्योत सिंह जैसे खिलाड़ियों के एनबीए में खेलने के वजह से एशिया सहित विश्व की हर टीम की नजर भारत पर है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि क्या इन मैचों के आयोजन भर से भारत में बास्केटबॅाल का विकास हो जाएगा? जवाब है बिल्कुल नहीं क्योंकी जो काम भारतीय बास्केटबॅाल संध को करना चाहिए था वो नेशनल बास्केटबॅाल आफ अमेरिका कर रहा है। आज भारत में ना कोई पेशेवर लीग खेली जाती है और ना ही हमारी टीम इस काबिल है की वो बाहर की टीम से टक्कर ले पाएगी। लेकिन ऐसा शुरू से नहीं था। ये बात 2008 की है जब अंतराष्ट्रीय बास्केटबॅाल संघ और एनबीए बास्केटबॅाल आफ अमेरिका ने मिलकर बास्केटबॅाल विडाउट बॉर्डर्स प्रोग्राम का आयोजन कराया था, जहां पर कई देशों के खिलाड़ियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। यही से एनबीए ने भारत में कदम रखा था और ये सब बीफआई के सेक्रेटरी स्वर्गीय हरीश शर्मा के देख-रेख में हो रहा था।

शर्मा एक ऐसे इंसान थे जिन्होंने भारतीय बास्केटबॅाल को आगे बढ़ाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था। 2008 में शर्मा अमेरिका गए हुए थे जहां पर उन्होंने उस समय के एनबीए कमीश्नर डेविड स्टर्न के साथ मिलकर बैठक की और भारत में बास्केटबॅाल के विकास के लिए मदद मांगी। स्टर्न भी फौरन राजी हो गए और इसी के साथ एनबीए- बीफआई के बीच एक करार हुआ, जिसमें ये लिखा गया था की भारत में बास्केटबॅाल के विकास के लिए नेशनल बास्केटबॅाल आफ अमेरिका हर तरह का सहयोग पहुंचाएगा, जिसमें विदेशी कोच से लेकर आधारिक संरचना और एनबीए खिलाड़ियों को भारत का दौरा कराने की बात कही गई थी। तब से लेकर आज तक भारत में 35 से भी ज्यादा एनबीए खिलाड़ी आ चुके हैं जिसमें पाउस गसोल से लेकर केवीन डुरांट जैसे खिलाड़ी शामिल हैं।

एनबीए की भारत में एंट्री होने के साथ ही महींद्रा और रिलायंस जैसी कंपनिया भी भारतीय बास्केटबॅाल के सहयोग के लिए आगे आई । 2010 में आईमजी रिलांयस और बीफआई के बीच 30 साल का करार हुआ था। इस दौरान मुकेश अंबानी की कंपनी भारत में बास्केटबॅाल के विकास के लिए कई 100 करोड़ रूपए लगाने को राजी हो गई थी। अब खिलाड़ियों को उनकी काबिलियत के अनुसार पैसे मिलने लगे थे। लेकिन जहां सब कुछ अच्छा हो रहा था, तभी 2012 में खबर आई की हरीश शर्मा का निधन हो गया और यहां से भारतीय बास्केटबॅाल का विकास भी रूक गया। हालांकि इस दौरान भारत की राष्ट्रीय टीम अंतराष्ट्रीय प्रतियोगिता में अच्छा तो जरूर कर रही थी, लेकिन खिलाड़ियों को मिलने वाली सुविधाएं रूक सी गई और 2015 में भारतीय बास्केटबॅाल 2 गुटो में बंट गया।

एक संघ को कांग्रेस के गोविंदराज चला रहे थे, वंही दूसरी ओर प्रमोद महाजन की बेटी पुनम महाजन बीफआई की कमान अपने हाथ में लेना चाह रही थी और इस सबको देख रिलांयस ने भी अपने हाथ पीछे खीच लिए। इन सबके बावजूद भारतीय टीम अंतराष्ट्रीय प्रतियोगिता में अच्छा कर रही थी। 2015 फीबा एशिया चैंपियनशीप में भारत 8वां स्थान प्राप्त करने में सफल रहा था। 2003 के बाद ये पहला मौका था, जब भारतीय पुरूष बास्केटबॅाल टीम ने अंतराष्ट्रीय स्तर पर इतना अच्छा प्रदर्शन किया था। बीफआई की दम-खम की लड़ाई 2017 तक चली और अंत में पुनम महाजन ने बीफआई की कमान संभालने का फैसला लिया। लेकिन तब तक फिर भारतीय बास्केटबॅाल टीम की दुर्दशा हो चुकी थी। पुरूष और महिला टीम अंतराष्ट्रीय प्रतियोगिता में बुरी तरह पीट रहे थे।

एक समय में चीन जैसी टीम को हराने वाली हमारी टीम सीरिया जैसी कमजोर टीम से हारना शुरू कर चुकी थी। 2016 के बाद अभी तक भारतीय पुरुषों या महिलाओं की टीम किसी भी प्रतियोगिता या मुकाबले को जीतने में असफल रही है अगर दक्षिण एशिया या श्रेणी-2 के मुकाबलों को छोड़ दिया जाए। इस बीच यह देखना दिलचस्प होगा की क्या एनबीए भारतीय बास्केटबॅाल को विकास की पटरी पर दोबारा ले आ पाता है या नहीं?

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