बुधवार, अक्टूबर 28, 2020
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भारत के लिए ओलंपिक पदक जीत चुकी सभी महिला खिलाड़ी

टोक्यो ओलंपिक को शुरू होने में अब कुछ महीनों का ही समय शेष बचा है। कई खिलाड़ियों ने इसके लिए टिकट हासिल कर लिया है जबकि कई खिलाड़ी इसके लिए कड़ी मशक्क्त कर रहे हैं। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि सभी खिलाड़ी इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता को ध्यान में रखकर अपनी तैयारियों में व्यस्त हैं। किसी भी खिलाड़ी के लिए अपने देश का प्रतिनिधित्व करना बड़ी बात है और ओलंपिक जैसी बड़ी प्रतियोगिता में देश के लिए खेलना हर खिलाड़ी चाहता है।

ओलंपिक खेलों के इतिहास में अब तक भारत का प्रदर्शन अपेक्षाकृत नहीं रहा है। अगर संक्षिप्त में कहा जाय तो भारत के लिए अब तक सिर्फ 15 खिलाडियों ने व्यक्तिगत स्पर्धाओं में पदक जीता है। इन 15 खिलाड़ियों में 5 महिला खिलाड़ी शामिल रही हैं। आज हम बात करेंगे ऐसी ही महिला खिलाड़ियों की जिन्होंने ओलंपिक में देश के लिए पदक जीता है।

(कर्णम मल्लेश्वरी, साल-2000, सिडनी ओलंपिक)

कर्णम मल्लेश्वरी

बीसवी सदी में भारत की ओर से कोई भी महिला खिलाड़ी पदक हासिल नहीं कर सकी। फिर 21वीं सदी का उत्तरार्द्ध हुआ और साल 2000 में ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में ओलंपिक खेलों का आयोजन हुआ। नई सदी में महिलाओं में भारत के लिए ओलंपिक में सबसे पहला पदक कर्णम मल्लेश्वरी ने जीता। उन्होंने भारत्तोलन में 69 किग्रा भारवर्ग में कांस्य पदक हासिल किया और पहली भारतीय महिला ओलंपिक पदक विजेता होने का गर्व हासिल किया।

(एमसी मैरीकॉम, साल-2012, लंदन ओलंपिक)

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एमसी मैरीकॉम

भारत के लिए ओलंपिक में पदक जीतने वाली दूसरी महिला खिलाड़ी दिग्गज मुक्केबाज एमसी मैरीकॉम रही जिन्होंने साल 2012 में हुए लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक हासिल किया। उन्हें सेमीफाइनल मुकाबले में से हार का सामना करना पड़ा। छह बार की विश्व चैम्पियन मैरीकॉम से पूरे देश को स्वर्ण पदक की उम्मीद थी लेकिन निर्णायक मुकाबले में उन्हें शिकस्त झेलनी पड़ी।

(साइना नेहवाल, साल-2012, लंदन ओलंपिक)

Saina Nehwal
साइना नेहवाल

एक दौर था जब बैडमिंटन में चीनी खिलाड़ियों का वर्चस्व स्थापित था। उस दौर में साइना नेहवाल ने भारतीय बैडमिंटन के लिए एक नया रास्ता बनाया। उन्होंने चीनी शटलरों के दबदबे को कम किया और अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करवाई। भारतीय दिग्गज शटलर साइना ने ओलंपिक में कांस्य पदक हासिल किया। उन्हें सेमीफाइनल मैच में से हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद कांस्य पदक के लिए हुए मुकाबले में विपक्षी शटलर चोटिल हो गई और साइना को कांस्य पदक मिला।

(पीवी सिंधु, साल-2016, रियो ओलंपिक)

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पीवी सिंधु

साइना के नक्शेकदमों में अब एक और भारतीय महिला शटलर निकल पड़ी थी और सपना देख चुकी थी ओलंपिक खेलों में भारत का नाम रोशन करने का। पुलैला गोपीचंद की एक और शिष्या पीवी सिंधु ने अपने प्रदर्शन से सबको प्रभावित किया। उन्होंने ओलंपिक के फाइनल में पहुंचकर देश के लिए रजत पदक पक्का किया। भारत को स्वर्ण पदक की आस थी, लेकिन जो चाहो और वो मिल जाये ऐसा नहीं होता। खिताबी मुकाबले में उन्हें स्पेनिश शटलर कैरोलिना मारिन से शिकस्त झेलनी पड़ी। फाइनल मैच काफी रोमांचल रहा था।

(साक्षी मलिक, साल-2016, रियो ओलंपिक)

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साक्षी मलिक

पहलवानी का खेल मिट्टी से लेकर मैट तक जा पंहुचा लेकिन भारत की कहानी मिट्टी तक ही सीमित रही। लेकिन पिछले ओलंपिक खेलों में साक्षी मलिक ने अप्रत्याशित प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक जीत लिया। हरियाणा की साक्षी 58 किग्रा वर्ग को क्वार्टरफाइनल मैच में रूस की पहलवान के हाथों हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, उन्हें रेपीचेज़ के जरिये एक मौका मिला जिसे भुनाने में साक्षी ने कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने कांस्य पदक जीता और ओलंपिक में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनी।