शनिवार, सितम्बर 26, 2020
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ओलंपिक में व्यक्तिगत पदक जीत चुके सभी भारतीय खिलाड़ी

साल 2020 खेलों के लिहाज से महत्वपूर्ण रहने वाला है क्योंकि इस साल ओलंपिक खेलों का आयोजन होना है। निश्चित ही ओलंपिक खिलाड़ियों की सबसे कड़ी प्रतिस्पर्धाओं में से एक होता है। यहाँ दुनिया भर के तमाम खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का प्रमाण देते हैं और पदक हासिल करते हैं।

किसी भी खिलाड़ी के लिए प्रतियोगिता जीतना खास लम्हा होता है। लेकिन अगर पदक ओलंपिक खेलों में जीता गया हो तो इसका कद और बढ़ जाता है। भारत ने 1920 में पहली बार आधिकारिक तौर पर ओलिंपिक खेलों में हिस्सा लिया था। इस लिहाज से भारत इस साल अपने ओलिंपिक अभियान के 100 साल पूरे कर रहा है। भारत ने लगभग सौ साल लम्बे ओलंपिक इतिहास में गिनती के ही पदक जीते हैं। अगर टीम पदक को छोड़ दें तो भारत ने व्यक्तिगत स्पर्धाओं में कुल अब तक 15 पदक हासिल किये हैं। आज हम बात करेंगे उन खिलाड़ियों की जिन्होंने व्यक्तिगत स्पर्धाओं में भारत के लिए पदक जीते हैं।

केडी जाधव 1952 हेलसिंकी ओलंपिक

किसी भी क्षेत्र में जो सर्वप्रथम है वह उल्लेखनीय है, इसीलिए केडी जाधव का उल्लेख भारत के ओलंपिक विजेताओं में सबसे पहले किया जाता है। देश की आजादी के अगले ही साल 1948 लंदन ओलम्पिक खेलों में केडी जाधव ने कुश्ती में भारत का प्रतिनिधित्व किया। छोटे कद के बड़े पहलवान ‘केडी जाधव’ उन्होंने अपने पहले ओलंपिक खेलों में भले ही पदक न जीता हो लेकिन अपने प्रदर्शन से प्रभावित किया। अगले ओलंपिक में केडी जाधव ने कुश्ती में इतिहास रचते हुए कांस्य पदक जीता। केडी जाधव ने हेलसिंकी ओलंपिक में कुश्ती में 52 किलोग्राम वर्ग में भारत को कांस्य पदक दिलवाया।

लिएंडर पेस अटलांटा ओलंपिक 1996

Leander Paes

केडी जाधव के ओलम्पिक पदक के बाद भारत को 44 साल बाद अपना दूसरा व्यक्तिगत पदक हासिल हुआ, जब लिएंडर पेस ने साल 1996 में आयोजित हुए अटलांटा ओलंपिक में लॉन टेनिस में कांस्य पदक जीता। पेस ने रिचे रेनबर्ग, निकोलस पिरेरिया, थोमस और डिगो फुरलान को हरकार सेमीफाइनल का टिकट हासिल किया। खिताबी मुकाबले से एक कदम दूर सेमीफाइनल में पेस का मुकाबला अमेरिका के आंद्रे अगासी से हुआ जहां उन्हें शिकस्त झेलनी पड़ी। अगासी से हारकर लिएंडर पेस का अगला कांस्य पदक का मुकाबला ब्राजीली खिलाड़ी फरनेंडो मेलीजेनी से होना तय हुआ। दूसरी तरफ फरनेंडो अपने सेमीफाइनल में सरजेई से पहले ही हार चुके थे। निर्णायक मैच में युवा पेस ने 3-6, 6-2, 6-4 से यह मुकाबला जीतकर भारत को 1980 के बाद एकबार फिर मैडल की लिस्ट में ला दिया। ओलंपिक में पदक जीतना हर खिलाड़ी का सपना होता है और पेस ने अपना यह सपना सच किया।

(कर्णम मल्लेश्वरी, साल-2000, सिडनी ओलंपिक)

बीसवी सदी में भारत की ओर से कोई भी महिला खिलाड़ी पदक हासिल नहीं कर सकी। फिर 21वीं सदी का उत्तरार्द्ध हुआ और साल 2000 में ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में ओलंपिक खेलों का आयोजन हुआ। नई सदी में महिलाओं में भारत के लिए ओलंपिक में सबसे पहला पदक कर्णम मल्लेश्वरी ने जीता। उन्होंने भारोत्तोलन में 69 किग्रा भारवर्ग में कांस्य पदक हासिल किया और पहली भारतीय महिला ओलंपिक पदक विजेता होने का गर्व हासिल किया।