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2019 वर्ल्ड वेटलिफ़्टिंग चैंपियनशिप: जानिए कैसा रहा है भारतीय महिलाओं का इतिहास

2019 वर्ल्ड वेटलिफ़्टिंग चैंपियनशिप: जानिए कैसा रहा है भारतीय महिलाओं का इतिहास
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Syed Hussain

Published: 13 Sep 2019 7:48 AM GMT

वर्ल्ड वेटलिफ़्टिंग की शुरुआत बस कुछ ही दिनों बाद 18 सितंबर से थाईलैंड के पटाया में शुरू होने जा रही है, जहां भारत को काफ़ी उम्मीदें है। इस चैंपियनशिप में भारत की तरफ़ सबसे बड़ी दावेदारी मीरा बाई चानू पेश करने जा रही हैं। लेकिन उससे पहले हमें ये जानना भी बेहद ज़रूरी हो जाता है कि भारतीय महिलाओं का इतिहास वेटलिफ़्टिंग में कैसा रहा है।

भारतीय महिलाओं के लिए साल 1989 से ही वेटलिफ़्टिंग में क़ामयाबी की शुरुआत हो गई थी, और अब तक वेटलिफ़्टिंग के इस सबसे बड़े टूर्नामेंट में भारतीय महिलाओं ने 16 पदक भारत की झोली में दिए हैं। जिनमें कुंजारानी देवी, कर्नम मलेश्वरी, ललिता पोले, भारती सिंह, नीलम सेट्टी लक्ष्मी और मीरा बाई चानू शामिल हैं।

कुंजारानी देवी, वर्ल्ड चैंपियनशिप में 7 पदक

कुंजारानी देवी के नाम है 7 रजत पदक

भारतीय इतिहास की अब तक की सबसे बेहतरीन वेटलिफ़्टर में से एक रही हैं कुंजारानी देवी, अपने नाम की ही तरह इस चैंपियनशिप में भी कुंजारानी पदकों की रानी रही हैं। भारत को इस स्तर पर पहली बार कुंजारानी ने 1998 में पदक दिलाया था। लेकिन वह तो बस शुरुआत थी इस भारतीय महिला वेटलिफ़्टर ने 1989 के बाद 1991, 1992, 1994, 1995, 1996 और 1997 में रजत पदक जीता था।

कर्नम मलेश्वरी, वर्ल्ड चैंपियनशिप में 4 पदक

कर्नम मलेश्वरी ओलंपिक में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला वेटलिफ़्टर हैं

कर्नम मलेश्वरी पहली ऐसी भारतीय महिला हैं जिन्होंने वेटलिफ़्टिंग में भारत को ओलंपिक पदक दिलाया है। मलेश्वरी को पद्मश्री पुरस्कार से भी नवाज़ा जा चुका है, उनके नाम वर्ल्ड चैंपियनशिप में कुल 4 पदक हैं। मलेश्वरी ने पहली बार वर्ल्ड चैंपियनशिप में 1993 में मेलबर्न में 54 किग्रा वर्ग में 177.5 किग्रा भार उठाते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया था। इसके बाद आगे जाकर मलेश्वरी को वर्ल्ड चैंपियनशिप में तीन और पदक हासिल हुए।

1994 में तुर्की के इंसतम्बुल में आयोजित हुई वर्ल्ड वेटलिफ़्टिंग चैंपियनशिप में मलेश्वरी ने भारत को पहला गोल्ड मेडल दिलाया था। उन्होंने 54 किग्रा वर्ग में कुल 197.5 किग्रा भार उठाते हुए गोल्ड मेडल पर कब्ज़ा किया था।

1995 में एक बार फिर मलेश्वरी ने अपने स्वर्ण पदक की रक्षा की और लगातार दूसरी बार वर्ल्ड वेटलिफ़्टिंग में स्वर्ण पदक हासिल किया। हालांकि 1996 वर्ल्ड वेटलिफ़्टिंग चैंपियनशिप में वह गोल्ड की हैट्रिक बनाने से चूक गईं पर कांस्य पदक जीतते हुए पकदों की हैट्रिक ज़रूर बनाई।

ललिता पोले, वर्ल्ड चैंपियनशिप में 1 पदक

वर्ल्ड वेटलिफ़्टिंग चैंपियनशिप के लाइटवेट कैटेगिरी में पदक जीतने वाली ललिता पोले पहली भारतीय वेटलिफ़्टर हैं। 1989 वर्ल्ड वेटलिफ़्टिंग चैंपियनशिप में ललिता ने कांस्य पदक हासिल किया था।

भारती सिंह, वर्ल्ड चैंपियनशिप में 1 पदक

ललिता पोले अगर लाइटवेट कैटेगिरी में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला हैं तो हेवीवेट कैटेगिरी में भारत को पहला पदक भारती सिंह ने दिलाया था। 1993 में मेलबर्न वर्ल्ड वेटलिफ़्टिंग चैंपियनशिप में ही भारती सिंह ने कांस्य पदक जीता था। उन्होंने ये उपलब्धि 83 किग्रा वर्ग में हासिल की थी।

नीलम सेट्टी लक्ष्मी, वर्ल्ड चैंपियनशिप में 2 पदक

लाइटवेट कैटेगिरी में भारत की सबसे क़ामयाब महिला वेटलिफ़्टर में से एक हैं नीलम सेट्टी लक्ष्मी, और लाइटवेट कैटेगिरी में भारत के लिए आख़िरी बार उन्होंने इस बड़ी प्रतियोगिता में पदक जीता है। चाइना में हुए 1995 वर्ल्ड वेटलिफ़्टिंग चैंपियनशिप में नीलम ने रजत पदक पर कब्ज़ा जमाया था। इसके बाद 1997 में थाईलैंड में हुए वर्ल्ड वेटलिफ़्टिंग चैंपियनशिप में भी नीलम ने भारत को कांस्य पदक दिलाया था।

मीरा बाई चानू, वर्ल्ड चैंपियनशिप में 1 पदक

मीरा बाई चानू से इस बार भी है सबसे बड़ी उम्मीद

मीरा बाई चानू जो इस बार भारत की सबसे बड़ी उम्मीद हैं उन्होंने भी इस प्रतियोगिता में 2017 में गोल्ड मेडल जीता था। 23 साल की उम्र में ही चानू ने पहली बार 48 किग्रा की कैटेगिरी में गोल्ड मेडल जीतकर मलेश्वरी के बाद ऐसा करने वाली सिर्फ़ दूसरी भारतीय महिला बनीं थीं।

जानिए क्यों हैं मीरा बाई चानू से देश को सबसे ज़्यादा उम्मीदें ?

चानू ने पिछले साल हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में भी गोल्ड मेडल जीता था, उन्हें 2018 में राजीव गांधी खेल रत्न से भी नवाज़ा गया था, उम्मीद है कि इस बार भी चानू भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतें और कर्नम मलेश्वरी के बाद ऐसा करने वाली सिर्फ़ दूसरी महिला भारतीय वेटलिफ़्टर बनें।

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