शुक्रवार, नवम्बर 27, 2020
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मुंबई की 15 वर्षीय माया पिल्लै, बनीं सबसे कम उम्र की भारतीय फ्री-डाइवर

माया पिल्लै 10 साल की उम्र में अपने परिवार के साथ अंडमान की यात्रा पर गई थी और उसी यात्रा के दौरान उन्हें समुद्र से लगाव हो गया। पेशे से कार्डियोलॉजिस्ट उनके पिता सुधीर ने उन्हें स्कूबा डाइविंग के बारे में जानकारी दी। ऑनलाइन रिसर्च करने के दौरान माया ने जब इस खेल से जुड़ी तस्वीरें देखीं तो वे हैरान रह गईं

आज,वह थाईलैंड से लौटकर एक गर्व से भरी मुस्कान बिखेरती है जहाँ उन्होंने विश्व स्तरीय स्कूबा स्कूल्स इंटरनेशनल (एसएसआई) फ्री-डाइविंग में लेवल 2 कोर्स प्रमाणपत्र प्राप्त किया। इसने उसे 15 साल और दो महीने की उम्र पर लेवल 2 का कोर्स पूरा करने वाला सबसे कम उम्र भारतीय बना दिया है।

अगर आपको पता नहीं है कि फ्री-डाइविंग क्या है तो आपको बता दे यह “डाइविंग का एक रूप है जो पानी के नीचे सांस लेने पर निर्भर करता है जब तक कि आप सतह पर वापस नहीं आ जाते, इसमें स्कूबा गियर जैसे श्वास तंत्र का उपयोग नहीं होता है”

“मैं ऑनलाइन उन लोगों की तस्वीर देख सकती थी जो बिना सिलेंडर के डाइविंग कर रहे थे और मैं हमेशा सोचती थी कि वे कैसे सांस ले सकते हैं। फिर मैंने इसके बारे में पढ़ा और मुझे पता चला कि वे सांस नहीं लेते, बल्कि अपनी सांस रोके रखते हैं। फिर मैंने अपने पिता से पूछा कि क्या हम ऐसा कर सकते हैं, लेकिन फ्री डाइविंग के साथ बहुत सारे स्वास्थ्य सम्बन्धी खतरे जुड़े होते हैं।” – माया ने बताया, जिन स्वास्थ्य सम्बन्धी खतरों का ज़िक्र उन्होंने किया, उन्हीं के चलते उनके पिता सुधीर ने पहले इस बारे में रिसर्च की और एसएसआई सर्टिफाइड फ्री डाइविंग कोर्सेज़ आयोजित करने वाले थाईलैंड में स्थित एक अंतर्राष्ट्रीय फ्री डाइविंग स्कूल ब्लू इमर्शन में जून के मध्य का स्लॉट बुक कराया।

लेकिन मई के आखिर में माया को इंफेक्शन हो जाने के कारण अस्पताल में भर्ती होना पड़ा, वे लगभग 7 दिनों तक एंटीबायोटिक्स पर रहीं लेकिन उन्होंने हिम्मत दिखाते हुए अपने पिता और भाई के साथ थाईलैंड रवाना होने का फैसला लिया, और लेवल 2 तक का कोर्स सफलतापूर्वक पूरा किया। हालांकि, लेवल 3 का कोर्स करने के लिए उन्हें फिलहाल अपने 18 वर्ष के होने की प्रतीक्षा करनी पड़ेगी, 18 से कम उम्र में यह कोर्स नहीं किया जा सकता।