शनिवार, दिसम्बर 5, 2020
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टोक्यो 2020 पैरालंपिक्स की मशाल का अनावरण हुआ

2020 टोक्यो ओलिंपिक एवं पैरालम्पिक खेलों की आयोजन समिति ने 2020 पैरालम्पिक खेलों की मशाल की डिज़ाइन और मशाल रिले के कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। ओलिंपिक खेलों की तरह पैरालम्पिक खेलों के लिए भी मशाल को चेरी ब्लॉसम फूलों की तर्ज़ पर और समान तकनीक से ही डिज़ाइन किया गया है।

 

 अंतराष्ट्रीय पैरालम्पिक कमिटी ने इस बार मशाल रिले के लिए अंतर्निहित उद्देश्य “The Paralympic flame is for everyone – the accumulation of everyone’s passion for the Paralympic Games generates the flame”. (अर्थ: पैरालिम्पिक खेलों के लिए प्रत्येक व्यक्ति में जो जूनून है, उसका संचय एक लौ को उत्पन्न करता है – यह पैरालिम्पिक ज्योति सभी के लिए है।) रखा है।

 ग्रेट ब्रिटैन के स्टोक मैंडविले शहर में पैरालम्पिक खेलों के जन्मस्थान पर एक हेरिटेज फ्लेम फेस्टिवल का आयोजन किया जायेगा, जहां पर पैरालिम्पिक ज्योति को प्रज्वलित किया जायेगा। इसके बाद मेज़बान जापान के विभिन्न स्थानों पर 13 से 17 अगस्त के बीच फ्लेम फेस्टिवल मनाया जायेगा। पैरालिम्पिक खेलों की यह मशालें एवं ज्योतियाँ पैरालिम्पिक आंदोलन से जुड़े जापान के विभिन्न स्कूलों, अस्पतालों एवं अन्य सुविधा प्रदान करने वाले स्थानों पर भी ले जायी जाएगी।

 “Share your light” (अर्थ: अपने जूनून को एक दूसरे के साथ बांटे) के विचार के साथ पैरालिम्पिक मशाल रिले का उद्देश्य लोगो में पैरालिम्पिक खेलों के लिए एक उत्सव का वातावरण बनाना तथा उसी समय सम्पन्न हुए ओलिंपिक खेलों के सामान इन खेलों के प्रति भी वही उत्साह बनाये रखना है। इस उद्देश्य के पीछे एक भावना ये भी है कि इस रिले के दौरान होने वाली हर एक व्यक्तिगत मुलाकात आपसी सद्भावना को बढ़ावा देगी एवं समाज को उज्जवल बनाने में मदद करेगी।

 टोक्यो 2020 पैरालिम्पिक टोर्च रिले विभिन्न क्षेत्रों और क्षमताओं वाले प्रत्येक व्यक्ति, समाज और इसके लोगो को एक-दूसरे के साथ भागीदारी करने का अवसर प्रदान होगा ताकि हर कोई सराहना करते हुए यह कह सके कि ये खेल “Unity in diversity” (अर्थ: विविधता में एकता) की विचारधारा के वाहक है।

 इस बार की मशाल रिले की सबसे बड़ी खासियत यह है कि मशाल धावक तीन-तीन धावकों के ग्रुप में मशाल लेकर चलेंगे, उन्हें इस बात का पहले से भी कोई ज्ञान नहीं होगा कि उनकी टीम में कौन शामिल है। इससे पूर्व किसी भी मशाल रिले में ऐसा कभी नहीं हुआ है। आयोजन समिति का ऐसा करने के पीछे उद्देश्य है कि ऐसा करने से हर व्यक्ति समाज में विविधता पर विचार करेगा एवं एक पूर्ण समावेशी समाज के फायदों का एहसास कर पायेगा। ऐसी उम्मीद है कि मशाल धावकों के चयन के मानदंडों की घोषणा 2019 की शरद ऋतू में की जाएगी।

 पैरालिम्पिक मशाल रिले के प्रतीक चिन्ह के लिए भी ओलिंपिक मशाल रिले की तर्ज़ पर जापानी “ukiyo-e” वुडब्लॉक प्रिंटिंग तकनीक से २ रंगो के उत्कृष्ट टोन लेन के लिए “fukibokashi” (फुकिबोकाशी) तकनीक का उपयोग किया गया है। इसका सुनहरा पीला रंग जहाँ विविध व्यक्तिव को दर्शाता है वही इसका ऑक्रोसस रंग उत्सवी माहौल तथा धरती की मिटटी की याद दिलाता है। इन दोनों रंगो का मिश्रण मशाल की लौ को दर्शाता है।

 ओलिंपिक खेलों की तरह पैरालिम्पिक खेलों में भी मशाल को खेलों की आत्मा माना जाता है। 1988 के ग्रीष्मकालीन पैरालिम्पिक खेलों के वक़्त सर्वप्रथम पैरालिम्पिक मशाल रिले का आयोजन हुआ था, उस समय रिले का पूरा मार्ग 105 किलोमीटर रखा गया था तथा करीबन 282 मशाल धावकों ने मिलकर इस दुरी को तय किया था।