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EXCLUSIVE: पूर्व अंतर्राष्ट्रीय निशानेबाज़ शिमौन शरीफ़ ने कई मुद्दों पर की बेबाक बात, प्रो कबड्डी लीग की तरह शूटींग लीग के शुरू होने का दिया सुझाव

EXCLUSIVE: पूर्व अंतर्राष्ट्रीय निशानेबाज़ शिमौन शरीफ़ ने कई मुद्दों पर की बेबाक बात, प्रो कबड्डी लीग की तरह शूटींग लीग के शुरू होने का दिया सुझाव
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Syed Hussain

Published: 23 Oct 2019 11:12 AM GMT

साल 2012 में पूर्व भारतीय शूटर शिमौन शरीफ़ का नाम लिमका बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स में दर्ज कर दिया गया था, क्योंकि उन्होंने शूटींग के ऊपर भारत की पहली वेबसाइट www.indianshooting.com की स्थापना की थी। जिसका मक़सद था भारत में शूटींग के खेल को विकसित करना और लोकप्रिय बनाना। आज भी पूर्व अंतर्राष्ट्रीय शूटर शिमौन का सपना है कि जिस खेल में भारत सबसे ज़्यादा पदक जीतता है, वह देश का सबसे लोकप्रिय खेल बने।

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शिमौन से शूटींग के इतिहास, वर्तमान और भविष्य को लेकर द ब्रिज हिन्दी के कंटेंट हेड सैयद हुसैन ने खुल कर बात की, जिसमें शिमौन ने कहा कि प्रो कबड्डी लीग की तरह भारत में शूटींग की भी लीग होनी चाहिए।

सवाल: पहले और अब में भारत में शूटींग में कितना और कैसा बदलाव आया है ?

शिमौन शरीफ़: कुछ साल पहले तो ऐसा था कि शूटींग में कुछ ख़ास एज ग्रुप से ही शूटर्स आते थे जैसे कि 25 से 35 साल के बीच। लेकिन अब काफ़ी युवा शूटर भी आ रहे हैं, और ये बेहद अच्छा बदलाव है। इसकी वजह से अब भारत के पास अनुभव और युवा जोश का अच्छा मिश्रण उपलब्ध है। इतना ही नहीं अब सोच में भी बदलाव आया है, पहले समय था कि शूटर सिर्फ़ ओलंपिक में भाग लेने जाते थे लेकिन अब इनका लक्ष्य सिर्फ़ भाग लेने तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि पदक जीतना हो गया है।

सवाल: रियो ओलंपिक में भारत को शूटींग में एक भी पदक नहीं मिला था, इस बार कुछ परिवर्तन होगा ?

शिमौन शरीफ़: रियो और इस बार होने वाले टोक्यो 2020 ओलंपिक में आपको काफ़ी फ़र्क़ देखने को मिलेगा। इसकी वजह है भारतीय शूटर्स का मौजूदा फ़ॉर्म, इस साल के चारों वर्ल्डकप में भारत का प्रदर्शन शानदार रहा है, हम हर वर्ल्डकप में नंबर-1 रहे। जो रियो से पहले नहीं था।

शिमौन शरीफ़, पूर्व भारतीय शूटर (तस्वीर सौ:फ़ेसबुक)

सवाल: बाग़पत के जोहरी में शूटींग को लेकर आपकी क्या राय है, जिसपर 'सांड की आंख' नाम से एक फ़िल्म भी प्रदर्शित होने वाली है ?

शिमौन शरीफ़: पहले बागपत में शूटींग के बारे में कोई जानता भी नहीं था, इसकी शुरुआत 1998 में डॉ राजपाल ने की थी जो ख़ुद भी एक शूटर थे। उन्होंने जोहरी राइफ़िल एसोसिएशन नाम से एक अकादमी बनाई, ये शूटींग रेंज एक मस्जिद के अंदर थी। उनके पास बहुत कम संसाधन थे, बंदूके बहुत मंहगी हुआ करती थीं। लेकिन वह गांव में इसे लोकप्रिय करना चाहते थे, तब उन्होंने ईंट पत्थर का इस्तेमाल किया और इससे बच्चों को होल्डिंग प्रैक्टिस कराई। बंदूक की जगह गन्नों के साथ बच्चे प्रैक्टिस करते थे और उसके बाद धीरे धीरे उन्होंने पिस्टल दिलाई। इसके बाद वहां के बच्चों को काफ़ी मदद मिली और कुछ बच्चों को नौकरी भी मिलने लगी जिसके बाद लोगों को लगने लगा कि इस खेल में करियर बनाया जा सकता है। कई बच्चों ने राष्ट्रीय टीम में भी जगह बनाई, देखते ही देखते शूटींग बाग़पत में लोकप्रिय होने लगी। इतना ही नहीं इसके बाद उनमें से कई शूटर्स ने अपनी अकादमी भी बना ली, उन्हीं में से एक अमित श्योरॉण हैं जो पहले डॉ राजपाल की अकादमी में प्रैक्टिस करते थे और फिर उन्होंने अपनी अकादमी बनाई। इसी तरह सौरभ चौधरी भी आगे आए। और इन्हीं के बीच दो दादियां भी बाहर आईं, जो प्रकाशी तोमड़ और चंद्रो तोमड़ हैं और इन्हीं पर अब फ़िल्म आ रही है।

सवाल: क्या अभी भी शूटींग और आगे बढ़ाने की ज़रूरत है, और है तो कैसे ?

शिमौन शरीफ़: मुझे लगता है कि शूटींग को अभी भी बहुत प्रमोशन की ज़रूरत है, इसके लिए लीग बनाने की ज़रूरत है। प्रो कबड्डी लीग और प्रो रेसलिंग लीग की तरह अगर शूटींग लीग की शुरुआत हो तो निशानेबाज़ी भी काफ़ी ऊपर और लोकप्रिय हो जाएगी। सबसे ज़्यादा पदक शूटींग में ही भारत के लिए आते हैं, लेकिन इसके बाद भी शूटींग उतनी लोकप्रिय नहीं है। इसलिए मैं कहता हूं कि शूटींग की भी लीग बननी चाहिए।

युवा शूटर को प्रशिक्षण देते शिमौन शरीफ़ (तस्वीर सौ:फ़ेसबुक)

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सवाल: भारतीय सरकार और खेल मंत्री से आपको क्या उम्मीदें हैं, क्या उनके लिए कोई सुझाव ?

शिमौन शरीफ़: पहले राजवर्धन सिंह राठोर और अब किरेन रिजिजू ये दोनों ही शूटींग और सभी ओलंपिक खेलों के लिए काफ़ी मदद कर रहे हैं। राजवर्धन की देन है खेलो इंडिया तो किरेन रिजिजू फ़िट इंडिया मूवमेंट लेकर आए हैं। सरकार की तरफ़ से ज़ाहिर तौर पर खेल को बढ़ावा मिल रहा है, फिर भी मैं ये कहूंगा कि शूटींग के लिए जो बंदूकें होती हैं वह बाहर से आती हैं और काफ़ी महंगी होती हैं। और वह भी वही शूटर ले सकता है जो रेजिस्टर शूटर हो, और उसपर भी 18% GST लगती है, तो मैं चाहूंगा कि इसपर से सरकार को GST हटा देना चाहिए ताकि ये बंदूकें थोड़ी सस्ती हों जाएं।

सवाल: भारत इस बार 2020 टोक्यो ओलंपिक में शूटींग में कितने पदक जीत सकता है और आपकी नज़र में प्रबल दावेदार कौन हैं ?

शिमौन शरीफ़: इससे पहले हमने अभी तक शूटींग में 4 पदक जीते हैं, 2004 में एक, 2008 में एक और 2012 में दो लेकिन 2016 में एक भी नहीं जीते। लेकिन आप यक़ीन मानिए 2020 में कम से सम तीन या चार पदक भारत को मिल सकते हैं, जिसमें से 3 तो मुझे लगता है कि कहीं नहीं गया। अगर नामों की बात करें तो मनु भाकर और सौरभ चौधरी से सबसे ज़्यादा उम्मीद है जबकि संजीव राजपूत का अनुभव देश को पदक दिलाने में क़ामयाब हो सकता है।

सवाल: रविवार को करणी सिंह में दो दिग्गजों के बीच मारपीट की घटना सामने आई, जिसका वीडियो आपने पोस्ट भी किया था। क्या था पूरा मामला और ऐसा हुआ क्यों ?

करणी सिंह रेंज अभी काफ़ी दबाव में है, शॉटगन की सुविधा सिर्फ़ करणी सिंह शूटींग रेंज में ही है। इसलिए करणी सिंह में पूरे देश से शूटर्स प्रैक्टिस करने के लिए आते हैं, और फिर उनकी तादाद इतने हो जाती है कि शॉटगन के लिए सभी के बीच बहुत समय होता है। उस दिन भी वही हुआ शॉटगन को लेकर आपस में योगिन्दर पाल सिंह और बाबर ख़ान के बीच बहस हुई और फिर नौबत मारपीट तक पहुंच गई। लेकिन ये नहीं होना चाहिए था, मैं 1995 से करणी सिंह रेंज में जा रहा हूं और ये पहली बार है जब मैंने ऐसी चीज़ें सुनी या देखी। शूटर को काफ़ी शांत और संयम होना ज़रूरी होता है, क्योंकि शूटींग में बंदूकें रहती हैं ये कोई फ़ुटबॉल की तरह खेल नहीं है जहां खिलाड़ी आक्रामक हो सकते हैं।

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