गुरूवार, सितम्बर 24, 2020
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द ब्रिज EXCLUSIVE: कोच टीम का एक दोस्त होता है, और कप्तान कोच का नुमाइंदा – कृष्ण कुमार हुडा

प्रो कबड्डी लीग का सीज़न-7 दबंग दिल्ली के लिए शानदार जा रहा है, प्ले-ऑफ़ में सबसे पहले जगह बनाने वाली दिल्ली ने अब तक 17 मैचों में 72 अंक हासिल किए हैं और उन्हें सिर्फ़ दो मैचों में हार मिली है। जिसके बाद इस टीम को टूर्नामेंट के सबसे बड़े दावेदारों में से एक माना जा रहा है।

द ब्रिज और नवीन एक्सप्रेस की EXCLUSIVE बातचीत देखने के लिए क्लिक करें यहां:

इस टीम की शानदार क़ामयाबी का श्रेय वैसे तो कप्तान जोगिंदर नरवाल और इस सीज़न में लगातार 15 और कुल 16 सुपर-10 का रिकॉर्ड बनाने वाले नवीन कुमार को जाता है। लेकिन सही मायनों में जीत की पटकथा, रणनीति और खिलाड़ियों की छिपी प्रतिभा को निखारने का काम करते हैं पर्दे के पीछे रहने वाले कृष्ण कुमार हुडा। कृष्ण कुमार हुडा दबंग दिल्ली के हेड कोच हैं और उनकी तैयारी और मेहनत का ही नतीजा है जो आज दिल्ली अपनी दबंगई दिखा रही है।

द ब्रिज के साथ बातचीत करते हुए कृष्ण कुमार हुडा ने दिल्ली की इस क़ामयाबी का राज़ बताया और इसका श्रेय किसी एक की जगह उन्होंने पूरी टीम को दिया। द ब्रिज हिन्दी के कंटेंट हेड सैयद हुसैन और कृष्ण कुमार हुडा के साथ हुई बातचीत के प्रमुख अंश।

सवाल: क्या है आपकी टीम की इस क़ामयाबी का राज़ ?

जवाब: मुझे शुरू से ही अपनी इस टीम और मेरे खिलाड़ियों पर पूरा भरोसा था। जिसकी झलक पिछले ही सीज़न में दिख गई थी जब हम पहली बार आख़िरी-4 तक पहुंचने में क़ामयाब हुए थे। इस बार उसी को हमने आगे बढ़ाया है, और आगे भी इसी तरह बढ़ते हुए कोशिश करेंगे कि ख़िताब पर भी कब्ज़ा जमाएं।

सवाल: एक कोच का किसी टीम को क़ामयाब करने में कितना हाथ होता है ?

जवाब: देखिए, मैं यही कहूंगा कि करना खिलाड़ियों को होता है कोच तो बस बाहर से देख सकता है और बीच बीच में दिशा निर्देश देता है। लेकिन एक बात ये ज़रूर है कि कोच टीम का दोस्त होता है, जैसे एक दोस्त अच्छे या बुरे समय में दूसरे दोस्त का साथ देता है वैसे ही एक कोच भी दोस्त की तरह टीम का हौसला बढ़ाता है। कोच का दिल साफ़ होता है और वह किसी भी तरह से पक्षपात से दूर रहता है तभी जो 7 खिलाड़ी मैट पर उतरते हैं वह अपना बेस्ट दे पाते हैं। मैं भी बिल्कुल इसी तरह हर एक खिलाड़ी के साथ खड़ा रहता हूं।

सवाल: सुपर-10 के सुल्तान नवीन एक्सप्रेस के बारे में क्या कहना चाहेंगे ?

जवाब: नवीन पिछले सीज़न में जब NYP के ज़रिए हमारे साथ जुड़ा था तभी मुझे उसकी प्रतिभा और हुनर के बारे में पता चल गया था। मैंने उसे समझाया, हौसला बढ़ाया और आज वह जो कर रहा है सभी के सामने है।

दबंग दिल्ली के मालिक और खिलाड़ियों के साथ कोच कृष्ण कुमार हुडा

सवाल: दबंग दिल्ली में कोच और कप्तान की जोड़ी बहुत मशहूर है, जोगिंदर नरवाल के बारे में क्या कहेंगे आप ?

जवाब: जोगिंदर बहुत शानदार और बड़ा खिलाड़ी है लेकिन मेरे साथ उसके रिश्ते प्रो कबड्डी से ही नहीं बल्कि काफ़ी पहले से हैं। जब मैं हरियाणा पुलिस में कोच था तब से मैं जोगिंदर को जान रहा हूं और तब भी मैं जोगिंदर का गुरू रहा था, इसलिए हमारी समझ अच्छी है और वह भी अपनी उम्र का असर खेल पर नहीं पड़ने देता और शानदार अंदाज़ में मैट पर खेलता है और पूरी टीम को साथ लेकर चलता है। सच पूछिए तो कप्तान एक तरह से कोच का नुमाइंदा होता है, और मेरे लिए जोगिंदर भी वही है मेरी बातों को वह मैट पर इम्पलिमेंट करता है।

सवाल: एक कोच के तौर पर कितनी चुनौती होती है जब कोई प्रतिभाशाली खिलाड़ी अपना बेस्ट नहीं दे पा रहा हो ?

जवाब: ऐसे मौक़ों पर कोच का काम होता है कि उस खिलाड़ी पर भरोसा जताए और उससे अच्छा करवाने के लिए उसका हौसला बढ़ाता रहे। जो मैं अक्सर करता हूं और हर खिलाड़ी की कमियों और उसकी ताक़त को समझता हूं।

सवाल: आजकल देखने को मिल रहा है कि कई रेडर डिफ़ेंडर को छुए बिना लॉबी में चले जाते हैं और उनको पकड़ने के लिए जो डिफ़ेंडर उनके साथ लॉबी में जाते हैं वह भी आउट हो जाते हैं, इसे कैसे देखते हैं आप ?

जवाब: ये एक टैक्टिक है जो कबड्डी के नियमों के अंदर है और उसी का प्रयोग करते हुए रेडर चालाकी के साथ प्वाइंट्स दिला देते हैं। मैं भी इन चीज़ों पर ध्यान देता हूं और अपनी टीम के डिफ़ेंडरों को भी सतर्क रहने की हिदायत देता हूं।

सवाल: कबड्डी में आने का सपना देखने वाले युवाओं को एक गुरू क्या संदेश देना चाहेंगे ?

जवाब: मैं उन बच्चों को यही कहना चाहूंगा कि आने वाला समय कबड्डी का ही है, बहुत ही बेहतरीन भविष्य है कबड्डी के इस खेल में, और अभी ही मुझे बहुत से अभिभावकों का फ़ोन आता रहता है कि हम अपने बच्चों का करियर कबड्डी में बनाना चाहते हैं। इसलिए मैं यही कहूंगा कि युवाओं के लिए कबड्डी में सुनहरा भविष्य है।

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