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मुक्केबाजी

Year 2022: मुक्केबाजी में भारत के लिए यह साल रहा बेहतरीन, देश को मिली निकहत जरीन जैसी स्टार खिलाड़ी

स्टार मुक्केबाज निकहत जरीन ने 2022 में स्वर्ण पदक की हैट्रिक लगाई

Nikhat Zareen Boxing
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निकहत जरीन

By

Pratyaksha Asthana

Updated: 2022-12-23T14:17:42+05:30

साल 2022 का अंत होने वाला है, यह साल खेल जगत के लिए बेहद खास रहा, जहां एक ओर राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने भारत का नाम ऊंचा किया तो वहीं कई खिलाड़ियों ने विश्व विजेता बनकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना परचम लहराया।

मुक्केबाजी में भी यह वर्ष ऐतिहासिक रहा। जहां एक ओर देश की दिग्गज मुक्केबाज मैरीकॉम के हाथ निराशा लगी, तो वहीं उनकी कमी को पूरा करने के लिए निकहत जरीन जैसी एक और स्टार खिलाड़ी देश को मिली। निकहत जरीन ने 2022 में स्वर्ण पदक की हैट्रिक लगाई। निकहत प्रतिष्ठित स्ट्रैंड्जा मेमोरियल टूर्नामेंट में दूसरा स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनी। इतना ही नहीं मैरीकॉम के नक्शे कदम पर चलते हुए युवा मुक्केबाज निकहत ने विश्व चैंपियन का खिताब भी अपने नाम किया।

बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में भी भारतीय मुक्केबाजों ने बेहतरीन प्रदर्शन दिखाया। निकहत ने यहां भी अपना जलवा दिखाया और स्वर्ण हासिल किया। निकहत के साथ नीतू घनघस और अमित पंघाल ने भी स्वर्ण अपने नाम किए। अमित पंघाल पिछले साल टोक्यो ओलंपिक में पदक के प्रबल दावेदार थे लेकिन वह शुरू में ही बाहर हो गए थे। रोहतक के इस मुक्केबाज ने हालांकि राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर शानदार वापसी की।

वहीं अनुभवी शिव थापा ने भी एशियाई चैंपियनशिप में अपना छठा पदक जीतकर इतिहास रचा। फाइनल में हालांकि चोटिल होने के कारण उन्हें मुकाबले के बीच में से हटकर रजत पदक से संतोष करना पड़ा था।

कुछ मुक्केबाजों के लिए यह साल निराशा भरा भी रहा, जिसमें बड़ा नाम लवलीना बोरगोहेन का है। टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर सुर्खियां बटोरने वाली लवलीना बोरगोहेन इस साल कुछ खास प्रदर्शन नहीं कर पाई। उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों से पहले अपनी निजी कोच संध्या गुरंग को 'एक्रीडेशन' नहीं मिलने का मुद्दा उठाया। यह मामला सुलझने के बाद हालांकि वह क्वार्टर फाइनल से आगे नहीं बढ़ पाई थी। हालाकि इस निराशा के बाद लवलीना ने एशियाई चैंपियनशिप में 75 किग्रा भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीता।

मैरीकॉम के लिए भी यह वर्ष अच्छा नहीं रहा। उन्होंने बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों पर ध्यान देने के लिए विश्व चैंपियनशिप और स्थगित किए गए एशियाई खेलों से हटने का फैसला किया था। लेकिन लंदन ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता और छह बार की विश्व चैंपियन मेरीकॉम ट्रायल्स में नीतू घनघस के खिलाफ मुकाबले के दौरान चोटिल हो गई, जिस वजह से वह राष्ट्रमंडल खेलों में भी भाग नहीं ले पाई।

इस साल मुक्केबाजी के लिए बुरी खबर भी सुनने में आई। संचालन संबंधी कई मसलों के कारण लॉस एंजिल्स में 2028 में होने वाले ओलंपिक खेलों के शुरुआती खेलों से मुक्केबाजी को हटा दिया गया है। हालाकि अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी संघ इस खेल को ओलंपिक में वापसी दिलाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। ऐसे में देखना यह होगा कि आने वाला साल मुक्केबाजों के लिए कौन से नए मौके लायेगा। खासकर भारत के पक्ष में, जिस तरह से भारतीय मुक्केबाज अपने शानदार प्रदर्शन से भारत को मुक्केबाजी के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे, उम्मीद है कि आने वाले साल में कई पदक भारत की झोली में आयेंगे।

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