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बैडमिंटन

गोपीचंद को देखकर शुरू किया सिंधु ने बैडमिंटन खेलना, उनकी ही कोचिंग में जीता देश के लिए ओलंपिक पदक

पीवी सिंधु आज मना रही अपना 27वां जन्मदिन

गोपीचंद को देखकर शुरू किया सिंधु ने बैडमिंटन खेलना, उनकी ही कोचिंग में जीता देश के लिए ओलंपिक पदक
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Amit Rajput

Updated: 2022-07-05T15:58:12+05:30

भारत की बैडमिंटन स्टार और दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधु आज अपना 27वां जन्मदिन मना रही है। सिंधु जब भी बैडमिंटन कोर्ट पर उतरतीं है तो देशभर को उनसे पदक की उम्मीदें होती है। वें देश के लिए ओलंपिक सहित कई बड़े और प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में पदक जीत चुकी है। सिंधु ने अपने खेल से देश और दुनिया के सभी लोगों को अपने खेल से प्रभावित किया है। सिंधु ने अपने करियर में जूनियर से ओलंपिक स्तर तक का सफर तमाम चुनौतियों के बीच तय किया है। आईये उनके जन्मदिन पर उनके करियर के बारे में जानते हैं।

माता-पिता दोनों प्रोफेशनल खिलाड़ी


पीवी सिंधु का जन्म 5 जुलाई, 1995 में आंध्र प्रदेश के हैदराबाद में हुआ था। पीवी सिंधु का पूरा नाम पुसरला वेंकट सिंधु है। सिंधु के माता पिता दोनों ही राष्ट्रीय स्तर के वॉलीबॉल खिलाड़ी थे। पीवी सिंधु के पिता का नाम पीवी रमना है, जिन्होंने 1986 के सियोल एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीता था। सिंधु का मां पी विजया भी प्रोफेशनल वाॅलीबाॅल प्लेयर थीं। यही वजह है कि बचपन से ही खेल के प्रति सिंधु का जुड़ाव रहा।

आठ साल की उम्र से खेलना शुरू किया बैडमिंटन


सिंधु ने आठ साल की उम्र से बैडमिंटन खेलना शुरू कर दिया था। दरअसल माता पिता दोनों उन्हें वॉलीबॉल खिलाड़ी बनाना चाहते थे लेकिन सिंधु का लगाव बैडमिंटन की ओर था। वह पुलेला गोपीचंद की सफलता से काफी प्रभावित थीं। उसी समय पुलेला गोपीचंद ऑल इंग्लैंड ओपन बैडमिंटन चैंपियन बने थे।

गोपीचंद अकादमी में सीखी बैडमिंटन


सिंधु ने बैडमिंटन की खेलने की शुरुआत सिकंदराबाद में इंडियन रेल्वे इंस्टिट्यूट ऑफ़ सिग्नल इंजीनियरिंग एंड टेलीकम्यूनिकेशन में मेहबूब अली की देखरेख में की। बाद में उन्होंने पुलेला गोपीचंद की बैडमिंटन अकादमी में दाखिला लिया। इस दौरान सिंधु का घर कोचिंग कैंप सिंधु के घर से 56 किलोमीटर दूर था, लेकिन वह रोज समय पर ट्रेनिंग ग्राउंड में पहुंचती थीं।

एशियाई जूनियर चैंपियनशिप में जीता स्वर्ण और कांस्य पदक

पीवी सिंधु ने अखिल भारतीय रैंकिंग चैम्पियनशिप और सब-जूनियर नेशनल जैसे जूनियर बैडमिंटन खिताब जीते। इसके बाद वह अंतरराष्ट्रीय लेवल की खिलाड़ी बन गईं। साल 2009 में सिंधु ने सब-जूनियर एशियाई बैडमिंटन चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता। वहीं एक साल बाद ईरान में अंतर्राष्ट्रीय बैडमिंटन चैलेंज में एकल रजत जीता। ये पीवी सिंधु की लगन और मेहनत का नतीजा ही था कि साल 2012 एशियाई जूनियर चैंपियनशिप में उन्होंने एक बार फिर जीत हासिल की। जिस मंच पर एक साल पहले सिंधु ने कांस्य पदक जीता था, वहीं अब उन्होंने अपना पहला स्वर्ण हासिल किया था।

दो लगातार ओलंपिक में जीते पदक


साल 2016 में रियो ओलंपिक में पीवी सिंधु ने रजत पदक जीता था। इसके बाद अगले टोक्यो ओलंपिक 2020 में उन्होंने कांस्य पदक हासिल किया। इस तरह सिंधु ने लगातार दो ओलंपिक में पदक जीतने वाली एकमात्र महिला खिलाड़ी होने की उपलब्धी हासिल की। सिंधु 2018 राष्ट्रमंडल खेलों के उद्घाटन समारोह में भारत की ध्वजवाहक रह चुकी हैं।

2020 में मिला पद्म भूषण


वही पीवी सिंधु को साल 2020 में भारत का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार- पद्म भूषण से सम्मानित किया जा चुका है। इसके पहले साल 2015 में सिंधु को पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। वही उन्हें सर्वोच्च खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न अवार्ड मिल चुका है। साल 2013 में पीवी सिंधु को अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया गया था।

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