गुरूवार, अक्टूबर 29, 2020
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2019 IAAF वर्ल्ड एथेलेटिक्स चैम्पियनशिप: भारत का नेतृत्व करेंगे 27 सितारे, टोक्यो 2020 जाने का सुनहरा मौक़ा

भारत में न कभी प्रतिभा की कमी रही है और न ही प्रतिभागियों की, पर जब अंतराष्ट्रीय खेलों और टूर्नामनेट्स की बात आती है तो हमारे खिलाड़ी चूक जाते हैं| ऐसा क्यों? क्यों ऐसा होता है कि साल भर हम उस एक खिलाड़ी के जीतने या फिर अच्छा प्रदर्शन करने के लिए पलके बिछाये इंतज़ार करते रहते हैं? और जब ऐसा कोई मिल जाता है तो उस खिलाड़ी को इतना बड़ा बना देते हैं कि उसके सामने कोई और नहीं दिखता? इसका उत्तर सिर्फ इतना ही है कि साल भर में कुछ एक या दो ऐसा खिलाड़ी उभर कर आते है, जिन्होंने अद्भुत प्रदर्शन कर देश का नाम रोशन किया हो| और यह सब तब, जब हमारे देश की जनसंख्या दुनिया में दूसरे नंबर की है| हमें हर साल बस इंतज़ार है किसी एक खिलाड़ी को भगवान का दर्जा देने का|

27 सितम्बर से वर्ल्ड एथलेटिक्स चैम्पियनशिप शुरू होने वाली है, इसमें भारत की तरफ से 27 खिलाड़ी भाग लेने वाले हैं, इस टूर्नामेंट में भारत से कितनी उम्मीदें हैं और हमें कितने पदक मिल सकते हैं, इसका एक अंदाज़ा आपको इस आर्टिकल को ख़त्म करते करते मिल जाएगा।

#1 जिनसन जोनसन

इस वर्ल्ड एथेलेटिक्स चैम्पियनशिप में अगर कोई भारत का सबसे बड़ा उम्मीदवार है तो वह हैं जिनसन जोनसन , जो हाल ही में ISTAF बर्लिन इवेंट में 3 मिनट और 35 .24 सेकंड्स में 1500 मीटर कम्पलीट कर न सिर्फ नेशनल रिकॉर्ड तोड़ा, बल्कि वर्ल्ड चैम्पियनशिप के लिए भी क्वालीफाई कर लिया| पर क्या यह आंकड़े, उनको वर्ल्ड चैम्पियनशिप में मेडल दिलाने के लिए काफी हैं? अगर माना जाए तो बिल्कुल हैं, 2017 के वर्ल्ड चैंपियनशिप्स में केन्या के एलिजाह मानगोई ने 3 मिनट और 33 . 61 से गोल्ड अपने नाम किया था| जिनसन इस मार्क से लगभग 2 सेकंड दूर हैं| कोलराडो में प्रैक्टिस कर रहे जिनसन, फ़िलहाल अच्छे फॉर्म में हैं तो मेडल के सबसे नज़दीक वहीं खड़े हो सकतें हैं|

#2 मुरली श्रीशंकर

राष्ट्रीय रिकॉर्ड होल्डर, लॉन्ग जम्पर, मुरली श्रीशंकर का 8 . 20 मीटर का नेशनल रिकॉर्ड कोई नहीं भूल सकता| पर इस साल उन्होंने 8 मीटर का मार्क तो क्रॉस किया है पर अपना बेस्ट नहीं दे पाएं है| दरअसल, श्रीशंकर को हील इंजरी से जूझना पड़ा था जिसके कारण उनके ट्रेनिंग में रूकावट आ गई थी| फिर भी वह एक वाजिब उम्मीदवार हैं क्योंकि वह विपरित परिस्थितियों में खुद को अच्छे से हैंडल कर पाते हैं|

हालांकि अगर देखा जाए तो भारत की सबसे बड़ी उम्मीदों में से एक नीरज चोपड़ा हो सकते थे, जैवलिन थ्रो में उनका फ़िलहाल कोई सानी नहीं है लेकिन चोट की वजह से वह इस टूर्नामेंट में शिरकत नहीं कर रहे हैं। इसी तरह एक महीने में 6 स्वर्ण पदक जीतकर तहलका मचाने वाली धावक हिमा दास भी चोटिल हैं।

इनके अलावा भारतीय एथलीट्स के इस दल में ऐसा कोई नहीं है जो पूर्व वर्ल्ड चैम्पियंस के करीब तक पहुंच सके| ऐसे में इस टूर्नामेंट में भारत से पदकों की उम्मीद करना बेईमानी होगी।