शनिवार, सितम्बर 26, 2020
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जन्मदिन विशेष: हिमा दास के वर्ल्ड चैंपियनशिप के पदक ने भारतीय एथलेटिक्स को नई दिशा दी

हिमा दास भारतीय एथलेटिक्स की पोस्टर गर्ल हैं। उनका जन्म असम के ढिंग गांव में एक किसान परिवार में हुआ। “ढिंग एक्सप्रेस” के नाम से मशहूर हिमा ने अब तक तमाम प्रतियोगिताओं में पदक जीते हैं, लेकिन निश्चित ही उनके करियर की अब तक की उपलब्धियों में से जो खास है, वह उनका वर्ल्ड चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक है। इसके अलावा उन्होने जकार्ता में खेले गये एशियाई खेलों का रजत पदक भी अपने नाम किया।

पिछले साल जुलाई और अगस्त महीने के बीच में हिमा ने 5 गोल्ड जीते और समूचे भारतवर्ष की खूब सराहना बटोरी। हालांकि इन प्रतियोगिताओ का दूसरा पहलु यह भी था कि उन्होंने इस बीच जिन प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया वह रैंकिंग पॉइंट्स के लिहाज से ठीक नहीं थी। हिमा ने E और F श्रेणी की प्रतियोगिताओं में यह पदक जीते जो कि निचले स्तर की प्रतियोगिताएं हैं। सरल शब्दों में कहा जाय तो हिमा ने जिन प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक जीते उनमें कोई भी धाविका उनके टक्कर की नहीं थी।

वह पदक जिससे भारतीय एथलेटिक्स को नयी ऊर्जा मिल गई :

तारीख थी 12 जुलाई साल था 2018 और जगह थी फिनलैंड। रेटिना स्टेडियम में खेली जा रही आईएएएफ अंडर-20 वर्ल्ड चैंपियनशिप में नया इतिहास रचा जाना था। भारत की सोन चिड़िया हिमा दास ने 400 मीटर की दौड़ में हिस्सा लिया और इस दौड़ को 51.46 सेकेंड के समय के साथ पूरा किया। उन्होंने यह दौड़ अव्वल रहते हुए खत्म की और भारत की झोली में स्वर्ण पदक डाल दिया। वह भारत की ओर से वर्ल्ड चैंपियनशिप में (किसी भी आयु वर्ग में) पदक जीतने वाली इकलौती एथलीट हैं। हिमा के इस स्वर्ण पदक से उन्हें नई पहचान मिल गई। उनकी इस जीत के बाद से भारतीय एथलेटिक्स को एक नई दिशा मिल गई है। भारतीय एथलीट जो विश्व स्तर पर आखिरी पंक्ति में नजर आते थे, अब पहली पंक्ति में आने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं।

अब नया इतिहास रचा जा चुका है। नया कीर्तिमान स्थापित हो चुका है। अब जरुरत है तो अपने खेल के स्तर को और उठाने की जिससे विश्व स्तर पर हमारे एथलीट का कद बौना नजर ना आये। वह दिन दूर नहीं है जब भारतीय एथलीट पहली पंक्ति में नजर आयेंगे। नया साल हिमा के लिए चुनौतियां से भरा रहने वाला है। उनके सामने सबसे बड़ी अगली चुनौती आगामी टोक्यो ओलंपिक में अपनी जगह बनाने की होगी।