शुक्रवार, फ़रवरी 26, 2021
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टोक्यो ओलंपिक में पदक जीतना चाहते हैं एथलीट धरूण अय्यासामी

भारत में एथलेटिक्स में पिछले कुछ सालों से जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। इस समय के एथलेटिक्स को देखकर भारत में फिर से 60 के दशक की तरह एथलेटिक्स के स्वर्णिम दौर के वापस आने की उम्मीद बढ़ चली है। वैसे तो इस समय भारत में काफी एथलीट हैं, जिनसे विश्व स्तर में पदक जीतने की उम्मीद की जा रही है। वहीं भारत टोक्यो ओलंपिक में भी इन खिलाड़ियों से देश का नाम रोशन करने के सपने देख रहा है। इस समय भारतीय एथलेटिक्स में धरूण अय्यासामी का नाम सबकी जुबान पर चढ़ा हुआ है। क्योंकि यह खिलाड़ी जब भी ट्रैक पर उतरता है तो इसके गले में पदकों की संख्या में इजाफा होता है। वहीं यह हर बार कोई नया रिकार्ड बनाकर साथ सबको चौंका देता है। 2018 एशियाई खेलों के रजत पदक विजेता धरूण अय्यासामी ने हाल ही में पटियाला में हुए फेडरेशन कप में अपना ही राष्ट्रीय रिकार्ड तोड़ दिया। धरूण ने पुरूषों की 400 मीटर बाधादौड़ प्रतियोगिता में 48.80 का रिकार्ड समय दर्ज कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। वहीं इसके साथ ही उन्होंने आगामी आईएएएफ विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप का टिकट भी कटा लिया। बता दे कि दोहा में इस साल होने वाले विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाइंग मार्क्स 49.30 सेकेंड था, लेकिन धरूण ने 48.80 सेकेंड में ही रेस अपने नाम कर लिया। साथ ही धरूण की यह टाइमिंग अलगे साल टोक्यो में होने वाले ओलंपिक में जगह बनाने के लिए भी काफी है।

 वैसे तो धरूण ने ट्रैक पर दौड़कर देश का नाम कई बार रोशन किया है। लेकिन इस बार फेडरेशन कप में उनकी जंग खुद से ही थी। पिछले साल पटियाला के इसी ट्रैक पर धरूण ने राष्ट्रीय रिकार्ड तोड़ा था। साथ ही उन्होंने दुनिया को बता दिया था कि भारत के एथलीट अब 50 सेकेंड के पड़ाव को पार करने के काबिल है और वो किसी भी टाइमिंग तक पहुंच सकते है। राष्ट्रीय रिकार्ड बनाने और विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में जगह बनाने वाले धरूण ने द ब्रिज से खास बातचीत करते हुए कहा कि 

‘मुझे यह रिकार्ड हासिल कर के काफी अच्छा लग रहा है। मैने तो सिर्फ विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में जगह हासिल करने का सोचा था। मेरे दिमाग में था कि मै 49 सेकेंड तक की टाइमिंग हासिल कर लूंगा। लेकिन अब तो राष्ट्रीय रिकार्ड बन गया जिसके लिए मै काफी खुश हूं ‘। 

 साल 2018 में जकार्ता में हुए एशियन गेम्स में 400 मीटर बाधादौड़ में धरूण ने शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक पर कब्जा किया था। उस समय धरूण ने 48.96 सेकेंड का समय दर्ज किया था। इसके बाद धरूण ने पटियाला में अपना जलवा बिखेरा और 48.80 का समय दर्ज किया। इन दिनों धरूण ने अपने प्रदर्शन में सुधार करने के लिए किस तरह की मेहनत की उसके बारे में बातचीत करते हुए उन्होंने ब्रिज से बताया कि

‘मैने अपने ट्रेनिंग में ज्यादा बदलाव नहीं किया था। मैने सिर्फ लगातार ट्रेनिंग करना जारी रखा जिसकी वजह से मै इस मुकाम तक पहुंच सका ‘।  

चित्र : एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया

 अपने बचपन के दिनों में खो-खो खेलने वाले धरूण अय्यासामी का एथलेटिक्स चुनने का फैसला काफी शानदार रहा। अगर धरूण इस समय एथलेटिक्स में नहीं होते तो शायद भारत को 400 मीटर बाधादौड़ में इतना शानदार धावक नहीं मिला होता। धरूण का भी मानना है कि ‘शुरूआती दिनों में खो-खो छोड़ एथलेटिक्स में आना काफी फायदेमंद रहा। क्योंकि खो-खो एक टीम गेम था। लेकिन एथलेटिक्स में मै अपने दम पर जो करना चाहूं कर सकता हूं’।

 आमतौर पर कहा जाता है कि एक व्यक्ति की सफलता में उसके परिवार का हाथ होता है। लेकिन जब वो व्यक्ति एक खिलाड़ी हो तो परिवार का किरदार और ज्यादा बढ़ जाता है। क्योंकि उस खिलाड़ी पर देश का नाम रोशन करने की जिम्मेदारी होती है और उसके इस सफर में परिवार सबसे अहम योगदान निभाता है। हालांकि धरूण के लिए परिवार की तरफ से सहयोग उनकी मां से मिला। छोटी उम्र में पिता का साथ छूट जाने के बाद दूसरों की तरह धरूण के हौंसले भी पस्त हो सकते थे। लेकिन इन समय उनका साथ निभाने के लिए मां ने अपनी जी जान लगा दी। धरूण भी मानते है कि उनकी मां के बिना वो कुछ भी नहीं है। अपनी मां के बिना वो कुछ भी नहीं कर सकते थे। धरूण ने द ब्रिज से खास बातचीत में बताया कि

‘मै अपनी मां के बिना कुछ भी नहीं हूं। मेरी अम्मा ने मेरे लिए बहुत कुछ किया है। उन्होंने इसके लिए काफी कड़ी मेहनत की ताकि मै अपने सपने को हासिल कर सकूं। पिताजी के जाने के बाद मां ही है जिन्होंने मुझे किसी भी चीज की कमी नहीं महसूस होने दी ’।

 एशियन गेम्स और राष्ट्रीय स्तर पर अपने शानदार प्रदर्शन से सबका दिल जीतने वाले धरूण से अब टोक्यो ओलंपिक 2020 में उम्मीदें बढ़ चली है। पूरा हिंदुस्तान चाहता है कि वह ओलंपिक में मेडल भारत की झोली में डालें और देश का नाम रोशन करें। हालांकि धरूण का मानना है कि अगर उन्हें टोक्यो ओलंपिक में पदक जीतना है तो टाइमिंग में थोड़ा और सुधार करना होगा। अगर वो अपने टाइमिंग को थोड़ा और कम कर लेते है, तो वह ओलंपिक में पदक जीत सकते है। साफ है धरूण भारतीय एथलेटिक्स का भविष्य है। वह हर दिन एक नए आयाम लिख रहे हैं। वहीं वह अपने सपने को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत भी कर रहे है। द ब्रिज के साथ पूरे भारत को उम्मीद है कि तमिलनाडू से निकलकर देश विदेश में नाम कमाने वाले धरूण ओलंपिक में पदक जीतकर दुनिया में भारत का डंका बजाएंगे।