बुधवार, अक्टूबर 28, 2020
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तो क्या अब कोई नहीं करेगा आर्चरी वर्ल्ड कप फ़ाइनल्स में भारत का नेतृत्व ?

भारतीय तीरंदाजडी संघ के बीच जारी मतभेद का ख़ामियाज़ा आर्चरर्स को भुगतना पड़ रहा है| अब नतीजा ये है कि साल के अंत में होने वाले वर्ल्ड कप फाइनल इवेंट में भारत का कोई भी तीरंदाज़ नहीं जा सकता है|

वर्ल्ड आर्चरी फेडरेशन ने 5 अगस्त को आर्चरी एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया (AAI ) को निलंबित किया था और उसके बाद से भारतीय तीरंदाजों की किस्मत डामाडोल नज़र आ रही है| साल भर में कुल 4 वर्ल्ड कप इवेंट्स होते हैं और एक वर्ल्ड कप फाइनल्स| जो आर्चरर्स इन 4 वर्ल्ड कप्स में मेडल हासिल करते हैं या पॉइंट में बढ़ोतरी करते हैं वह वर्ल्ड कप फाइनल्स के लिए क्वालिफाई करते हैं| कमाल की बात तो यह है कि भारत से युथ आर्चरी में कोमोलिका बारी के आलावा किसी और सीनियर तीरंदाज़ ने मेडल नहीं जीता है| इसके पीछे की वजह जान कर आप सर पकड़ लेंगे| ऐसी लापरवाही के लिए जितना इन तीरंदाजों का ख़राब प्रदर्शन ज़िम्मेदार है उससे कहीं ज़्यादा फेडरेशन का स्वार्थ ज़िम्मेदार है|

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दरअसल, इस बार फेडरेशन ने तय किया था कि 4 वर्ल्ड कप में से दो में टॉप तीरंदाज़ भाग लेंगे और बाकि दो में बी टीम हिस्सा लेगी| कोलंबिया में शुरू हुई इस वर्ल्ड कप सीरीज में पहले टीम बी ने अपना दांव खेला और बुरी तरह हार कर वापस आ गई| दूसरा इवेंट चीन में 6 से 12 मई को हुआ जिसमे टीम फ्लाइट लेट होने के कारण पहुंची ही नहीं पाई| जी हाँ! आपने ठीक पढ़ा है| जब फ्लाइट डिले हुई तो फेडरेशन को फ़ोन लगाया गया पर किसी ने फ़ोन नहीं उठाया| ऐसे में आप खुद सोचिये किसको ज़िम्मेदार ठहराया जाये|

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तीसरे और चौथे वर्ल्ड कप में ख़राब प्रदर्शन का नतीजा है कि कोई खिलाड़ी वर्ल्ड कप फाइनल तक नहीं पंहुचा| पुरषों ने भले ही ओलंपिक्स के लिए क्वालिफाई कर लिया हो पर महिलाओं में कोई नहीं है जिसने ओलंपिक्स तो दूर की बात है, मॉस्को में हो रहे वर्ल्ड कप फाइनल के लिए भी क्वालिफाई किया हो| इसमें खिलाड़ियों कि क्या गलती अगर उनका फेडरेशन ही इतना लापरवाह व्यवहार कर रहा हो|

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ऐसा नहीं है कि अब महिला टीम ओलंपिक्स में हिस्सा नहीं ले सकती, फर्क सिर्फ इतना है कि यह निश्चित नहीं है कि भारत के तीरंदाज़ भारत से खेलेंगे या नहीं| अगर ओलंपिक्स तक यह मामला नहीं सुलझा तो आर्चरर्स ओलिंपिक फ्लैग के अंदर खेलेंगे| बात शायद यहाँ ख़त्म नहीं होती क्योंकि यह छोटी बात नहीं है कि अपने देश के खिलाड़ी किसी और झंडे के अंदर खेलें और वो भी फेडरेशन की गलतियों के कारण|

इस पूरे मामले का बोझ अब इन तीरंदाजों को उठाना पड़ेगा| दीपिका कुमारी ने ओलिंपिक टेस्ट इवेंट में सिल्वर जीत कर यह तो साबित कर दिया था कि वह ओलंपिक्स के लिए तैयार हैं पर सवाल अब हमारे देश और आर्चरी फेडरेशन पर खड़ा होता है कि क्या वह ऐसी प्रतिभा के अभिभावक कहलाने लायक हैं?